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PSC बीमारी के लक्षण (लिवर समस्या)
PSC बीमारी के लक्षण (लिवर समस्या)
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स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस : लिवर की बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव जानिए लिवर की दुर्लभ बीमारी के लक्षण

बार-बार गैस, पेट में भारीपन, थकान और त्वचा में खुजली जैसी समस्याएं केवल पाचन की परेशानी नहीं, बल्कि प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस (PSC) जैसी लिवर बीमारी के संकेत हो सकती हैं। जानिए इस दुर्लभ बीमारी के लक्षण, कारण, जोखिम और बचाव के तरीके।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
21 Jul 2026, 04:27 PM
नई दिल्ली

घर का खाना खाने के बाद भी अगर बार-बार गैस, पेट में भारीपन और एसिडिटी की समस्या रहती है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस (PSC) जैसी लिवर से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। इसमें लिवर के अंदर और बाहर मौजूद पित्त नलिकाओं में सूजन और फाइब्रोसिस बनने लगता है, जिससे समय के साथ सिरोसिस, लिवर फेलियर या बाइल डक्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

 जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना और अनियमित खानपान का सीधा असर पाचन तंत्र और लिवर की सेहत पर पड़ सकता है। खाना खाने के बाद पेट में भारीपन, गैस, थकान और त्वचा में खुजली जैसे लक्षण प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस की ओर इशारा कर सकते हैं। यह एक दुर्लभ लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जिसमें पित्त नलिकाएं सिकुड़ने और सख्त होने लगती हैं।

प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस क्या है?

प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस (PSC) एक क्रॉनिक लिवर डिजीज है, जिसमें पित्त नलिकाओं में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है। धीरे-धीरे इन नलिकाओं में फाइब्रोसिस बनने लगता है, जिससे वे संकरी हो जाती हैं और पित्त का प्रवाह प्रभावित होता है। इससे लिवर में पित्त जमा होने लगता है और सिरोसिस व लिवर फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।

लक्षणों को पहचानना जरूरी

  • खाना ठीक से न पचना
  • लगातार थकान रहना
  • त्वचा में खुजली होना
  • पेट के दाहिने हिस्से में दर्द
  • भूख कम लगना
  • वजन घटना
  • आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
  • बार-बार बुखार या ठंड लगना

शरीर के अंदर क्या बदलाव होते हैं

पीएससी में पित्त नलिकाओं में सूजन और संकुचन के कारण बाइल का प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे लिवर की कोशिकाओं पर दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे फाइब्रोसिस की स्थिति बन सकती है। इसके कारण शरीर में फैट और विटामिन ए, डी, ई और के जैसे पोषक तत्वों का अवशोषण भी प्रभावित हो सकता है। पित्त का प्रवाह सही तरीके से नहीं होने पर फैट को पचाने में परेशानी हो सकती है। मरीजों में वजन कम होना, कमजोरी, पोषण की कमी और लगातार पाचन संबंधी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।

पीएससी के प्रमुख जोखिम कारक

  • परिवार में पहले किसी को पीएससी होना
  • इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज (खासकर अल्सरेटिव कोलाइटिस)
  • 30 से 50 वर्ष की उम्र
  • पुरुषों में अधिक जोखिम
  • कुछ आनुवंशिक बदलाव
  • प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया

इलाज और बचाव कैसे संभव है

फिलहाल पीएससी को पूरी तरह खत्म करने वाला कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। उपचार का उद्देश्य बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करना, संक्रमण से बचाव करना और लिवर को ज्यादा नुकसान से बचाना होता है। डॉक्टर नियमित जांच और दवाओं के जरिए मरीज की स्थिति पर नजर रखते हैं।

समय पर जांच से कम हो सकता है

प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस धीरे-धीरे लिवर और पित्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली गंभीर बीमारी है। लंबे समय तक गैस, थकान, खुजली, पीलिया या पाचन संबंधी समस्या रहने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर पहचान और इलाज से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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