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फ्रांस की ASN4G मिसाइल से लैस होगा राफेल F5, भारत की  दिलचस्पी
फ्रांस की ASN4G मिसाइल से लैस होगा राफेल F5, भारत की दिलचस्पी
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फ्रांस : बड़ा रक्षा कदम, राफेल F5 से जुड़ेगी हाइपरसोनिक न्यूक्लियर मिसाइल

फ्रांस ने अगली पीढ़ी की परमाणु-सक्षम हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ASN4G के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसे भविष्य के राफेल F5 लड़ाकू विमान के साथ जोड़ा जाएगा। यह मिसाइल मौजूदा ASMP-A प्रणाली की जगह लेगी और फ्रांस की रणनीतिक परमाणु क्षमता को और मजबूत करेगी। राफेल F5 में उन्नत सेंसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिस्टम और आधुनिक युद्ध तकनीकों को शामिल करने की योजना है। यह विकास भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारतीय वायुसेना पहले से राफेल विमानों का संचालन कर रही है और भविष्य में राफेल F5 को लेकर भी रुचि दिखाई गई है।

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प्रकाशित: 13 Jun 2026, 07:52 PM · अपडेट: 03 Oct 2026, 01:29 AM
पेरिस
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
फ्रांस ने अपनी अगली पीढ़ी की परमाणु-सक्षम हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ASN4G के विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह मिसाइल भविष्य के राफेल F5 लड़ाकू विमान के साथ एकीकृत की जाएगी और फ्रांस की रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का हिस्सा बनेगी। इस घोषणा ने वैश्विक रक्षा जगत का ध्यान खींचा है, वहीं भारत के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना पहले से राफेल लड़ाकू विमानों का संचालन कर रही है और भविष्य में राफेल F5 को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं फ्रांसीसी रक्षा खरीद एजेंसी डायरेक्शन जेनरेल डे ल आर्मामेंट (DGA) ने ASN4G मिसाइल के विकास और तैनाती से जुड़े ढांचे की जानकारी साझा की है। यह मिसाइल मौजूदा ASMP-A परमाणु मिसाइल की जगह लेने के लिए विकसित की जा रही है।

ASN4G मिसाइल

ASN4G को फ्रांस की चौथी पीढ़ी की परमाणु-सक्षम एयर-लॉन्च हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह ध्वनि की गति से कई गुना अधिक रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगी, जिससे दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है। फ्रांस लंबे समय से अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है और ASN4G उसी रणनीति का हिस्सा है। इस मिसाइल का उद्देश्य भविष्य के युद्धक्षेत्र में फ्रांस की रणनीतिक बढ़त बनाए रखना है।

राफेल F5 

राफेल F5 को मौजूदा राफेल विमानों का सबसे उन्नत संस्करण है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिस्टम, बेहतर सेंसर, उन्नत नेटवर्किंग क्षमता और मानव रहित लड़ाकू प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय जैसी सुविधाएं शामिल किए जाने की योजना है। फ्रांस का लक्ष्य है कि राफेल F5 आने वाले दशकों तक उसकी वायु शक्ति की रीढ़ बना रहे। ASN4G जैसी मिसाइल के साथ इसका एकीकरण इसकी रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करेगा।

FCAS परियोजना में देरी के बीच आया फैसला

फ्रांस, जर्मनी और स्पेन मिलकर फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) परियोजना पर काम कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्देश्य छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान विकसित करना है, लेकिन हाल के वर्षों में परियोजना की गति को लेकर कई सवाल उठे हैं। ऐसे समय में ASN4G और राफेल F5 पर बढ़ता फोकस इस बात का संकेत माना जा रहा है कि फ्रांस अपने मौजूदा लड़ाकू बेड़े को और अधिक सक्षम बनाने पर भी समानांतर रूप से काम कर रहा है।

भारत के लिए विकास

भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा है, जिसने हाल के वर्षों में वायु शक्ति को नई मजबूती दी है। रक्षा क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार भारत और फ्रांस के बीच राफेल F5 के संभावित भविष्य सहयोग को लेकर भी बातचीत होती रही है। ASN4G एक फ्रांसीसी परमाणु प्रतिरोधक कार्यक्रम का हिस्सा है और इसके निर्यात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, फिर भी राफेल F5 से जुड़ी तकनीकी प्रगति पर भारत की नजर बनी रह सकती है।

बदलते युद्ध की तैयारी

दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां हाइपरसोनिक हथियारों के विकास पर तेजी से काम कर रही हैं। अमेरिका, रूस, चीन और अब फ्रांस भी इस क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में ASN4G परियोजना को भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फ्रांस का यह फैसला केवल एक नई मिसाइल के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले दशकों के लिए उसकी वायु और परमाणु रणनीति की दिशा भी तय कर सकता है।
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