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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़
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भारी तनाव : अमेरिकी सेना ने नाकाम किए ईरानी आत्मघाती ड्रोन हमले, डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए कई ईरानी वन-वे अटैक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। अमेरिका का कहना है कि इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 13 Jun 2026, 10:22 AM · अपडेट: 25 Oct 2026, 08:43 PM
वाशिंगटन
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में एक बार फिर सैन्य हलचल और तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने वाणिज्यिक (कमर्शियल) जहाजों को निशाना बनाने आ रहे कई ईरानी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है। इस घटना के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में भू-राजनीतिक समीकरण गरमा गए हैं, और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

"सुरक्षित है अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारा"

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरी घटना की जानकारी दी।

CENTCOM ने अपने बयान में कहा: > "ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के उद्देश्य से कई 'वन-वे अटैक ड्रोन' (आत्मघाती ड्रोन) लॉन्च किए थे। अमेरिकी सेना ने सतर्कता दिखाते हुए हाल के घंटों में उन सभी ड्रोनों को रास्ते में ही सफलतापूर्वक मार गिराया है।"

अमेरिकी सेना ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को आश्वस्त करते हुए साफ किया है कि इस हमले के बावजूद जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के पूरी तरह जारी है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारा पूरी तरह सुरक्षित व खुला हुआ है।

भारतीय जहाजों पर हमला बर्दाश्त नहीं

इस सैन्य तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने इस मुद्दे को भारत से भी जोड़ दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर सीधे तौर पर भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करना होगा और अपने आक्रामक रवैये में तुरंत बदलाव करना होगा, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम भुगतने हो सकते हैं।

क्या वाकई भारतीय जहाजों को बनाया गया निशाना? 

अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के बावजूद, अभी तक जमीनी हकीकत में कुछ कूटनीतिक सस्पेंस बना हुआ है:

  • भारत-ईरान की चुप्पी: इस घटना या गुरुवार के बाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास किसी भारतीय जहाज पर ड्रोन हमले को लेकर न तो भारत सरकार और न ही ईरानी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी किया गया है।

  • रणनीतिक सस्पेंस: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति और भारत के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को भुनाने के लिए इस तरह के कड़े बयान दे रहा है, जबकि भारत पारंपरिक रूप से ईरान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?

यह कोई पहला मौका नहीं है जब होर्मुज स्ट्रेट में ऐसा टकराव देखा गया हो। वैश्विक मोर्चे पर इस रास्ते की अहमियत को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

विशेषताविवरण
भौगोलिक स्थितिओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता जो पारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।
ऊर्जा सुरक्षादुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) के परिवहन का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
वैश्विक प्रभावयहाँ मामूली सा भी तनाव वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को अचानक बढ़ा देता है, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा मंडराने लगता है।
अमेरिकी सेना की त्वरित कार्रवाई ने भले ही एक बड़े संभावित नुकसान को टाल दिया हो, लेकिन ईरान की इस कथित हिमाकत और अमेरिका की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी देशों में युद्ध के बादलों को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है।
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