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France Protest: महंगाई और घटती सुविधाओं को लेकर फूटा जनाक्रोश, सड़कों पर उतरी जनता, कई शहरों में हिंसा और आगजनी
France Protest: बढ़ती महंगाई, आर्थिक तंगी, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज होने की खबर है। छात्रों से शुरू हुआ आंदोलन अब श्रमिक संगठनों और अन्य वर्गों तक फैल गया है। पेरिस, लियोन, लिमोज और मार्सिले समेत कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। खबर में 1,200 से अधिक गिरफ्तारियों और कम से कम 150 पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी उल्लेख है।
France Protest: रोजमर्रा की बढ़ती लागत और आर्थिक तंगी से परेशान लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर सामने आ गया है। शुरुआत में छात्रों द्वारा अपनी समस्याओं को लेकर उठाई गई आवाज ने अब एक
व्यापक जनआंदोलन का रूप ले लिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में सरकार विरोधी नारेबाजी के बीच हिंसा, आगजनी और लूटपाट की खबरें आ रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई शहरों में उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भी सीधे हमले किए हैं।
विरोध के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?
इस राष्ट्रव्यापी असंतोष के केंद्र में आसमान छूती महंगाई और आम जनता पर बढ़ता आर्थिक बोझ है। प्रदर्शन में शामिल लोगों का साफ कहना है कि दैनिक जरूरतों की वस्तुएं इतनी महंगी हो चुकी हैं कि परिवारों के लिए महीने का खर्च चलाना
बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके साथ ही, आम लोगों में इस बात को लेकर भी गहरा आक्रोश है कि देश के संसाधन और राजनीतिक ताकत सिर्फ कुछ ही हाथों तक सीमित होकर रह गई है।
केवल आर्थिक तंगी ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सेवाओं का गिरता स्तर भी इस आक्रोश का बड़ा कारण बना है:
शिक्षा क्षेत्र का संकट: स्कूलों की दयनीय हालत, शिक्षकों की भारी कमी और संसाधनों के अभाव से छात्र और शिक्षक दोनों सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।
श्रमिकों की मांगें: विभिन्न मजदूर संगठन बेहतर वेतन, सुरक्षित पेंशन व्यवस्था और सरकारी सेवाओं के संरक्षण की लगातार मांग कर रहे हैं।
पुलिसिया कार्रवाई का विरोध: प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ओर से की गई सख्ती और कथित हिंसा ने आग में घी डालने का काम किया है।
कौन-कौन हो रहा है इस आंदोलन में शामिल?
यह कोई किसी एक तबके का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि समाज का एक बड़ा वर्ग इसमें एक साथ नजर आ रहा है। आंदोलनकारियों में:
फ्रांस के प्रमुख और प्रभावशाली ट्रेड यूनियनों में से एक CGT ने भी इस आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है। सोशल मीडिया के जरिए आम नागरिकों से बड़ी संख्या में एकजुट होने और सड़कों पर आने की अपील की गई थी, जिसका व्यापक असर देखा जा रहा है।
हिंसा में कहां कितना हुआ नुकसान?
उपद्रव और आगजनी की लपटें राजधानी पेरिस से निकलकर देश के अन्य प्रमुख हिस्सों तक फैल चुकी हैं:
| शहर | हुए नुकसान का विवरण |
| पेरिस | दुकानों के शीशे तोड़े गए, कई जगह लूटपाट हुई और सड़कों पर खड़े वाहनों में आग लगा दी गई। |
| लियोन | उग्र भीड़ ने मशहूर टूरिस्ट ऑफिस की पूरी इमारत को आग के हवाले कर दिया। |
| लिमोज | यहां सिटी हॉल का एक बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। |
| मार्सिले | नगर प्रशासन के मुख्य कार्यालय और सरकारी भवनों में जमकर तोड़फोड़ की गई।
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1,200 से अधिक गिरफ्तार, सैकड़ों पुलिसकर्मी घायल
स्थिति पर काबू पाने के लिए प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने 17 अक्टूबर की देर रात जानकारी दी कि देशभर में अब तक 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने लगभग 400 लोगों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की थी। झड़पों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे कम से कम 150 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
आगे क्या?
कुल मिलाकर, फ्रांस में पनपा यह विरोध केवल महंगाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने व्यवस्था के प्रति गहरे अविश्वास का रूप ले लिया है। हालांकि, जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों और हिंसा-लूटपाट में शामिल अराजक तत्वों के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है। सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।