ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी : ब्लैक राइस बेचने के चक्कर में 28 लाख गंवाए, दिल्ली से एक और आरोपी गिरफ्तार
इंटरनेट के जरिए कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रही महासमुंद की ब्लैक राइस फर्म को साइबर ठगों ने फर्जी बायर्स और नकली सर्टिफिकेट के जरिए 28.47 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने मामले में फरार आरोपी आकाश शर्मा को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है।
इंटरनेट के जरिए देश-विदेश में अपना कारोबार फैलाने का सपना देख रहे कारोबारियों को निशाना बनाने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर काले चावल (Black Rice) का व्यापार करने वाली एक फर्म से करीब साढ़े 28 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है।
इस हाईटेक धोखाधड़ी में पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। काफी समय से फरार चल रहे आरोपी आकाश शर्मा को पुलिस ने दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।
अमर्त्य फर्म का संभालता है कामकाज
मामला महासमुंद (संभावित क्षेत्र, FIR विवरण अनुसार) के लभराखुर्द का है। यहाँ की रहने वाली 40 वर्षीय अनुपमा सेन 'सेन एंड सेन ऑर्गेनिक फर्म' की प्रोप्राइटर हैं, जबकि उनका बेटा अमर्त्य सेन इस फर्म का पूरा कामकाज संभालता है। यह फर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से राष्ट्रीय स्तर पर काले चावल का बड़ा कारोबार करती है।
डेटा डालते ही ठग नेटवर्क सक्रिय
करीब चार महीने पहले, अमर्त्य अपने उत्पाद को और बड़े स्तर पर बेचने के लिए इंटरनेट पर बायर्स (खरीददार) की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने 'ट्रेड इंडिया मार्ट ग्लोबल ट्रेड बाजार' नामक वेबसाइट पर अपने फर्म की जानकारी दर्ज की। वेबसाइट पर डेटा डालते ही ठगों का नेटवर्क सक्रिय हो गया।
बड़े बायर्स का दिया झांसा
खुद को ग्लोबल ट्रेड बाजार (दिल्ली) का कर्मचारी बताने वाले अंकित शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने अमर्त्य से संपर्क किया। उसने झांसा दिया कि वह उनकी फर्म को बड़े बायर्स दिलाएगा।
पहला कदम: 30 अप्रैल 2022 को अंकित ने रजिस्ट्रेशन के नाम पर एक वॉट्सऐप लिंक भेजा और अलग-अलग किश्तों में 68,000 रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
दूसरा कदम: इसके बाद आरोपियों ने फर्जी बायर्स तैयार कर अमर्त्य से काले चावल का रेट तय करवा दिया, ताकि भरोसा पक्का हो सके।
तीसरा कदम: खेल यहीं नहीं रुका। इसके बाद इंटरनेशनल ट्रेडिंग के लिए जरूरी कागजात जैसे ईजीसी (EGC) प्रमाण पत्र, एनओसी (NOC), ग्लोबल सर्टिफिकेट और सीएसडीई (CSDE) सिस्टम पंजीकरण का झांसा दिया गया।
इस काम के लिए अतुल शर्मा नाम के एक अन्य व्यक्ति की एंट्री हुई, जिसने खुद को 'दिव्य कम्युनिकेशन' का स्टाफ बताया। इन फर्जी सर्टिफिकेट्स को बनाने के नाम पर आरोपियों ने आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक और फेडरल बैंक के अलग-अलग खातों में कुल 28,47,600 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। बाद में जब इन दस्तावेजों की जांच की गई, तो सारे सर्टिफिकेट पूरी तरह फर्जी पाए गए।
ठगी का गणित:
रजिस्ट्रेशन के नाम पर: ₹68,000
सर्टिफिकेट्स के नाम पर (ICICI व फेडरल बैंक): ₹28,47,600
कुल धोखाधड़ी: ₹28,47,600 (सहित अन्य शुल्क)
सभी के खिलाफ मामला दर्ज
जब फर्म को अहसास हुआ कि वे एक बड़े सिंडिकेट का शिकार हो चुके हैं, तब पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद वेब कॉम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी अंकित शर्मा, फेडरल बैंक खाताधारक आकाश शर्मा और दिव्य कम्युनिकेशन के प्रोप्राइटर विवेक तोमर के खिलाफ अपराध क्रमांक 362/2022 के तहत मामला दर्ज किया।
नई दिल्ली से किया गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तफ्तीश का दायरा बढ़ाया और केस में धोखाधड़ी (420, 34 भादवि) के साथ-साथ भेष बदलकर ठगी करने (419), आपराधिक साजिश रचने (120B) और 66D आईटी एक्ट 2008 की धाराएं भी जोड़ीं। पुलिस इस मामले में पहले ही एक मुख्य आरोपी अंकित तोमर (पिता राजेश तोमर, उम्र 26 वर्ष, निवासी मोहन गार्डन, नई दिल्ली) को गिरफ्तार कर 25 जनवरी 2023 को अदालत में चालान पेश कर चुकी है।
पुलिस बैंक खातों को खंगालने में जुटी
वहीं, पुलिस की लगातार चल रही तफ्तीश और खोजबीन के बाद 14 जुलाई 2026 को इस गिरोह के एक और अहम मोहरे आकाश शर्मा (उम्र 26 वर्ष, निवासी- के-3/135, मोहन गार्डन, उत्तम नगर, साउथ वेस्ट नई दिल्ली) को दबोच लिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कड़ियों और बैंक खातों को खंगालने में जुटी है।