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छात्रावास में विधिक जागरूकता कार्यक्रम
छात्रावास में विधिक जागरूकता कार्यक्रम
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निःशुल्क कानूनी सहायता : न्याय सबके लिए संदेश के साथ छात्रावास में आयोजित हुआ विधिक जागरूकता कार्यक्रम

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में मौहारी भाठा स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संघपुष्पा भतपहरी ने छात्राओं को बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज, घरेलू हिंसा तथा महिलाओं और बच्चों से जुड़े कानूनों की सरल भाषा में जानकारी दी।

कीर्तिमान न्यूज
01 Jul 2026, 08:18 AM
महासमुंद
नालसा एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार जिलेे में विभिन्न जागरूकता विषयों पर अधारित सरल कानूनी शिक्षा के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश अनिता डहरिया के मार्गदर्शन पर जिले एवं तालुका स्थित न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों एवं आरक्षी केन्द्रों में पदस्थ अधिकार मित्रों द्वारा विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। 
अधिकार मित्र हरिचंद साहू ने अपने विज्ञप्ति में बताया कि आज प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संघपुष्पा भतपहरी द्वारा स्थानीय मौहारी भाठा स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास पहुंचकर उपस्थित छात्राओं को कानून के विभिन्न विषयों जैसे बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज, घरेलु हिंसा एवं महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित अपराधों का सरल भाषा के माध्मय से कानूनी जानकारी प्रदान की गई।      

विधिक सहायता पर दी जानकारी 

उक्त अवसर पर प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संघपुष्पा भतपहरी द्वारा छात्रावास के छात्राओं द्वारा उत्सुकता पूर्ण कानूनी सवालों का जवाब तलब कर सरल एवं सहजतापूर्ण सामान्य
कानूनी सहायता की दी जानकारी
भाषा में कानून के सामान्य पहलुओं पर अवगत कराया गया तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यो एवं दिए जाने वाली विधिक सहायता तथा सलाह के बारे में विस्तापूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि प्राधिकरण का उद्देश्य सभी के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना ताकि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण कोई भी न्याय से वंचित रहे। 

नि:शुल्क सहायता की व्यवस्था

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 ए में सभी के लिए न्याय सुनिश्चत किया गया है और गरीबों तथा समाज के कमजोर वर्गो के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था की गई है। सबके लिए समान अवसर एवं समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गो को सक्षम विधिक सेवाए प्रदान करने के लिए एक तंत्र की स्थापना करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पारित किया गया। जिसके तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन किया गया है, जो कानूनी सहायता कार्यक्रम लागू करने और उसका मूल्यांकन एवं उनके सतत निगरानी का कार्य कर लोगों को कानूनी सहायता एवं सलाह उपलब्ध कराती है। 

सेवा समिति का गठन 

इसी प्रकार प्रत्येक राज्य में एक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जिसके अंतर्गत उस राज्य के पूरे सभी जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा तहसील क्षेत्रों में तालुका विधिक सेवा समिति का गठन किया गया है। इसका कार्य नालसा की नीतियों और निर्देशो को कार्य रूप देना और लोंगो को निःशुल्क कानूनी सेवाए प्रदान कराना होता है।    
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