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जहाजों से भारी टोल वसूलना शुरू
जहाजों से भारी टोल वसूलना शुरू
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वैश्विक अर्थव्यवस्था : होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर जहाज से $20 लाख तक की वसूली कर रहा ईरान

ईरान ने दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नया टोल सिस्टम लागू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर जहाज से 1.5 से 2 मिलियन डॉलर तक की वसूली की जा रही है, जिसे क्रिप्टोकरेंसी, बार्टर सिस्टम और अन्य सेवाओं के माध्यम से लिया जा रहा है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।

कीर्तिमान न्यूज
08 Jun 2026, 10:20 AM
तेहरान

वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एक ऐसी चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों से भारी-भरकम टोल (टैक्स) वसूलना शुरू कर दिया है।

ईरान की संसद के योजना और बजट आयोग के सदस्य मोहसेन जंगनेह के हवाले से 'फार्स न्यूज एजेंसी' ने दावा किया है कि इस मार्ग का उपयोग करने वाले हर जहाज को ईरान औसतन 1.5 से 2 मिलियन डॉलर (करीब 12 से 16 करोड़ रुपये) का भुगतान करना पड़ रहा है।

क्या है ईरान का नया 'समुद्री टैक्स' सिस्टम?

  • नकद के बजाय क्रिप्टो और बार्टर का खेल: रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान यह भुगतान केवल नकद में नहीं ले रहा है। जहाजों को टेथर (USDT) जैसी क्रिप्टोकरेंसी, वस्तुओं की अदला-बदली (Barter System), और विभिन्न सेवाओं के माध्यम से भुगतान करने की छूट दी गई है।

  • कमाई का नया जरिया: ईरान के इस 'ट्रांजिट शुल्क' से उसका वार्षिक राजस्व 7.5 अरब डॉलर (7.5 Billion USD) तक पहुंचने का अनुमान है। यह पूरा पैसा सीधे ईरान के राष्ट्रीय खजाने में जा रहा है।

  • किसके नियंत्रण में है यह वसूली?: यह पूरी व्यवस्था ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्रालय और 'सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद' की सीधी देखरेख में 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' नामक एक नए संगठन द्वारा संचालित की जा रही है।

युद्ध के बाद बदली रणनीतिक स्थिति

गौर करने वाली बात यह है कि दुनिया भर के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का लगभग 20 प्रतिशत शिपमेंट इसी होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।

क्राइसिस टाइमलाइन: 28 फरवरी को क्षेत्र में युद्ध भड़कने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया था। अब इस जलमार्ग को आंशिक रूप से खोलने के बदले ईरान ने नया नियामक ढांचा (Regulatory Framework) लागू कर दिया है, जिसे वह समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण सेवाओं का शुल्क बता रहा है।

यदि यह जलमार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक बाजार से रोजाना 16 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति ठप हो जाएगी, जिससे दुनिया भर में मंदी और महंगाई का नया दौर आ सकता है।

🇮🇳 क्या भारत भी दे रहा है टोल? ड्रैगन और नई दिल्ली की चिंताएं

फिलहाल आधिकारिक तौर पर यह साफ नहीं है कि भारत आने-जाने वाले जहाजों को भी यह टोल देना पड़ रहा है या नहीं।

  • ईरान का रुख: ईरानी अधिकारियों का कहना है कि नियमों में "किसी भी देश को छूट नहीं" दी जाएगी।

  • भारत के लिए जोखिम: भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि भारतीय जहाजों को $2 मिलियन प्रति ट्रिप का भुगतान करना पड़ा, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं। हालांकि, ईरान के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को देखते हुए कूटनीतिक गलियारों में 'बैक-चैनल' वार्ताओं की सुगबुगाहट तेज है।

🇺🇸 अमेरिका की धमकी बनाम ईरान की शर्तें

इस नए टोल टैक्स ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है:

पक्षस्टैंड / शर्तें
अमेरिका (USA)अमेरिका ने इस टोल का कड़ा विरोध किया है और टोल चुकाने वाले जहाजों व कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। हालांकि, जमीनी हकीकत पर अमेरिका अभी खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहा है।
ईरान (Iran)तेहरान का रुख साफ है—स्थिति अब युद्ध से पहले जैसी कभी नहीं होगी। ईरान तभी ढील देगा जब उसे अमेरिका-इजरायल से दोबारा हमला न होने की गारंटी मिले और ईरान के बंदरगाहों से अवैध नाकेबंदी हटाई जाए।

दुश्मन देशों' के लिए नो-एंट्री

ईरान द्वारा गठित नई 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' न केवल टोल वसूल रही है, बल्कि जहाजों और उनके कार्गो की गहन जांच भी कर रही है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगी 'दुश्मन देशों' के स्वामित्व वाले जहाजों के लिए इस जलडमरूमध्य के दरवाजे पूरी तरह बंद रहेंगे।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम वैश्विक समुद्री कानून (UNCLOS) को खुली चुनौती है, लेकिन खाड़ी पर उसके भौगोलिक नियंत्रण के कारण जहाजों के पास कोई और रास्ता नहीं है। यदि अमेरिका बल प्रयोग करता है तो तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, और यदि वह चुप रहता है तो ईरान क्रिप्टोकरेंसी के दम पर अमेरिकी प्रतिबंधों को हमेशा के लिए बेअसर कर देगा।

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