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GPM Farmers: moving towards national recognition on the aroma of Vishnubhog rice.moving towards national recognition on the aroma of Vishnubhog rice.
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GPM Farmers: जीपीएम की पहचान बना विष्णुभोग चावल, 1,500 किसानों को मिल रहा फायदा

Vishnubhog Rice: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का पारंपरिक सुगंधित विष्णुभोग चावल अब एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत नई पहचान बना रहा है। पेंड्रा क्षेत्र में करीब 1,500 किसान 600 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं। वहीं महिलाओं की भागीदारी से धान की खरीदी, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन को बढ़ावा मिला है।

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प्रकाशित: 24 Aug 2026, 12:51 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 09:42 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
GPM Farmers: छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ अब विशिष्ट कृषि उत्पाद सुगंधित विष्णुभोग चावल के कारण भी नई पहचान बना रहा है। भारत सरकार की एक जिला-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत विष्णुभोग चावल को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना गया है। मनमोहक सुगंध, उत्कृष्ट स्वाद और पारंपरिक खेती की विशेषताओं के कारण विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले की विशिष्ट पहचान बन चुका है। विष्णुभोग की महक अब खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की सीमाओं को पार कर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है।
पेंड्रा क्षेत्र में लगभग 1,500 किसान करीब 600 एकड़ भूमि में विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। किसानों की मेहनत, सामूहिक प्रयास और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों ने इस विशिष्ट धान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। विष्णुभोग की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

विष्णु भैया सरकार में बहनों की मेहनत को मिल रहा बाजार

विष्णुभोग चावल की खेती से लेकर उसके प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन तक महिलाओं की भागीदारी इसे आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बना रही है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, पेंड्रा द्वारा किसानों से विष्णुभोग धान की खरीदी की जाती है। इसके बाद मिनी राइस मिल में धान का प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कार्य से समूह की 15 महिला सदस्यों को स्थायी रोजगार मिला है। महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समूह की महिलाओं द्वारा अब तक लगभग 2 टन विष्णुभोग चावल की सफलतापूर्वक बिक्री की जा चुकी है, जिससे उन्हें करीब 1 लाख रुपए का लाभ प्राप्त हुआ है।

बहनों का सम्मान और आत्मनिर्भरता, विकास की मजबूत पहचान

विष्णुभोग की सफलता यह बताती है कि जब स्थानीय संसाधनों को किसानों की मेहनत और महिला शक्ति का साथ मिलता है, तो पारंपरिक उत्पाद भी व्यापक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले के किसानों की समृद्धि, बहनों के स्वावलंबन और स्थानीय उद्यमिता का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है।

विष्णुभोग की सुगंध से राष्ट्रीय पहचान की ओर जीपीएम

एक जिला-एक उत्पाद योजना के माध्यम से विष्णुभोग चावल को उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का बेहतर मंच मिल रहा है। इसकी बढ़ती मांग स्थानीय किसानों और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। आने वाले समय में विष्णुभोग के उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन को और अधिक प्रोत्साहन मिलने से यह चावल छत्तीसगढ़ की विशिष्ट कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकता है। जीपीएम की धरती पर उगने वाला विष्णुभोग आज किसानों की मेहनत, बहनों के स्वावलंबन और विष्णु भैया के सुशासन में आगे बढ़ते आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुगंध को दूर-दूर तक पहुंचा रहा है।
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