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H-1B वीजा पर बढ़ी फीस का असर
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H-1B Visa Fee: ट्रंप सरकार का नया प्रस्ताव, भारतीय छात्रों और पेशेवरों की बढ़ी चिंता

H-1B Visa Fee: ट्रंप सरकार ने H-1B वीजा के तहत भर्ती करने वाली कंपनियों पर करीब 99 लाख रुपये फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। इससे अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों और विदेशी पेशेवरों के लिए नौकरी एवं ग्रीन कार्ड की राह मुश्किल हो सकती है।

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प्रकाशित: 28 Aug 2026, 11:52 AM · अपडेट: 12 Oct 2026, 01:19 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

H-1B Visa Fee: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने H-1B वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली कंपनियों से 1,03,265 डॉलर यानी करीब 99 लाख रुपये फीस वसूलने का प्रस्ताव रखा है। यह फीस केवल उन कंपनियों पर लागू होगी, जो सालाना निर्धारित H-1B वीजा कोटे के अंतर्गत कर्मचारियों की भर्ती करेंगी। अमेरिका में प्रत्येक वर्ष कुल 85 हजार H-1B वीजा जारी किए जाते हैं। इनमें 65 हजार वीजा सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए होते हैं, जबकि 20 हजार वीजा उन विदेशी विद्यार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जिन्होंने अमेरिका के किसी शिक्षण संस्थान से मास्टर या उससे ऊंची डिग्री हासिल की है।

अमेरिका में पढ़ रहे विदेशी छात्रों की बढ़ी चिंता

प्रस्तावित फीस से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों और अस्थायी वीजा धारकों की चिंता बढ़ गई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का यह प्रस्ताव वीजा कोटे के अधीन दाखिल होने वाली सभी H-1B याचिकाओं पर लागू हो सकता है। इस प्रस्ताव के दायरे में वे विदेशी विद्यार्थी भी आ सकते हैं, जिनका चयन H-1B लॉटरी में होता है और जो पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट स्टेटस से वर्क स्टेटस में जाना चाहते हैं। नई फीस लागू होने पर ऐसे छात्रों को नियुक्त करना अमेरिकी कंपनियों के लिए काफी महंगा हो सकता है। नई फीस का सबसे अधिक प्रभाव अमेरिका में मास्टर या उससे ऊंची पढ़ाई कर रहे भारतीय विद्यार्थियों पर पड़ने की आशंका है। ये विद्यार्थी 20 हजार वीजा वाले विशेष कोटे के तहत H-1B के लिए आवेदन करने के पात्र होते हैं।

कंपनियों को करना होगा फीस का भुगतान

विदेशी छात्रों या अस्थायी वीजा धारकों को यह फीस अपनी जेब से नहीं चुकानी होगी। भुगतान उस कंपनी को करना होगा, जो उम्मीदवार को नौकरी देने के बाद उसके लिए H-1B याचिका दाखिल करेगी। हालांकि, करीब 99 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से पीछे हटने पर मजबूर कर सकता है। अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को डर है कि प्रस्तावित फीस लागू होने के बाद कंपनियां उन्हें ग्रेजुएशन के बाद नौकरी देने से बच सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए अमेरिकी शिक्षा पूरी करने के बाद वहां अपना करियर शुरू करना कठिन हो सकता है।

OPT के बाद H-1B पर शिफ्ट होते हैं छात्र

अमेरिका में भारतीय विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद आमतौर पर ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के माध्यम से नौकरी शुरू करते हैं। इसके बाद वे H-1B वीजा पर शिफ्ट होने का प्रयास करते हैं, क्योंकि यह वीजा उन्हें लंबे समय तक अमेरिका में रहकर काम करने की अनुमति देता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे पहले एक लाख डॉलर की फीस का ऐलान किया था। पुरानी व्यवस्था मुख्य रूप से उन कंपनियों के लिए थी, जो विदेश में मौजूद कर्मचारियों को H-1B वीजा पर अमेरिका बुलाकर नियुक्त करना चाहती थीं। अमेरिका में पहले से रह रहे हालिया कॉलेज ग्रेजुएट और अन्य विदेशी नागरिक इसके दायरे में शामिल नहीं थे।

H-1B याचिका से सीधे जोड़ी जा सकती है नई फीस

नया प्रस्ताव इमिग्रेशन फीस से जुड़े नियमों के माध्यम से लागू किए जाने की तैयारी है। इसके तहत फीस को सीधे H-1B याचिका के साथ जोड़ा जा सकता है। ऐसा होने पर अमेरिका के अंदर पहले से मौजूद विदेशी विद्यार्थी और अस्थायी वीजा धारक भी इसके दायरे में आ सकते हैं। यदि कोई विदेशी छात्र F-1 वीजा पर अमेरिका आया, उसने अपनी डिग्री पूरी की और बाद में H-1B लॉटरी में उसका चयन हो गया, तो उसके लिए याचिका दाखिल करने वाली कंपनी को प्रस्तावित फीस देनी पड़ सकती है। यही नियम अमेरिका में दूसरे अस्थायी वीजा पर मौजूद विदेशी नागरिकों पर भी लागू हो सकता है।

नौकरी के साथ ग्रीन कार्ड की राह पर भी असर

H-1B वीजा को अमेरिका में लंबे समय तक नौकरी करने और आगे चलकर ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की महत्वपूर्ण राह माना जाता है। इसलिए प्रस्तावित फीस लागू होने पर भारतीय पेशेवरों और विद्यार्थियों के लिए न केवल नौकरी हासिल करना, बल्कि अमेरिका में स्थायी निवास की दिशा में आगे बढ़ना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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