पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बेहद बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार को इस सीट की मतगणना यानी वोटों की गिनती से जुड़े सभी जरूरी और अहम सबूतों को पूरी तरह सुरक्षित रखने का आदेश जारी किया है। जस्टिस गौरांग कांत की अदालत ने साफ कहा है कि वोटों की गिनती में गड़बड़ी के आरोपों को देखते हुए ईवीएम, वीवीपैट मशीनें, सीसीटीवी फुटेज और बाकी सभी रिकॉर्ड्स को पूरी सुरक्षा में संभालकर रखा जाए।
स्कूल के कैमरों का रिकॉर्ड रहेगा महफूज, छेड़छाड़ पर रोक
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जिस शेखावाटी मेमोरियल स्कूल को काउंटिंग सेंटर यानी मतगणना केंद्र बनाया गया था, उसके अंदर और बाहर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों का वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि अदालत की मंजूरी के बिना इन वीडियो या मशीनों को न तो मिटाया जाएगा, न बदला जाएगा और न ही नष्ट किया जा सकता है। वीवीपैट दरअसल एक ऐसी पर्ची काटने वाली मशीन होती है जिससे वोटर को यह पक्का पता चलता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं। इस मामले में अब बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी और उनके सलाहकारों को भी पक्षकार बनाया जाएगा। भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से मात दी थी।
ममता बनर्जी का आरोप- काउंटिंग के दिन मुझे धक्का दिया और मारा-पीटा
नतीजों से पहले स्ट्रॉन्गरूम के बाहर हुआ था भारी हंगामा
भवानीपुर सीट की कहानी चुनाव के नतीजों से एक दिन पहले यानी 3 मई को ही गरमा गई थी। स्ट्रॉन्गरूम वह बेहद सुरक्षित कमरा होता है जहां मतदान के बाद ईवीएम मशीनों को ताले और कड़े पहरे में रखा जाता है। उस दिन टीएमसी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि विरोधी दल की एक गाड़ी को बिना चेकिंग के स्ट्रॉन्गरूम के अंदर जाने दिया गया। इसके बाद ममता बनर्जी खुद करीब 4 घंटे तक स्ट्रॉन्गरूम के बाहर डटी रही थीं। अब अदालत इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के मूड में है, जिससे बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है।