HTC GST Raid: छत्तीसगढ़ के उद्योग जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारी वाहनों के परिवहन से जुड़ी प्रमुख संस्था हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी (HTC) पर राज्य जीएसटी (State GST) की टीम ने शिकंजा कसा है। भिलाई स्थित कंपनी के मुख्य दफ्तर और बलौदाबाजार स्थित यार्ड में दो दिनों तक चली व्यापक छापेमारी के बाद करीब 10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का खुलासा होने का दावा किया गया है। जीएसटी विभाग की विशेष टीम ने 24 और 25 अगस्त को कंपनी के ठिकानों पर दबिश दी थी।
जीएसटी दफ्तार में उपस्थित होने के निर्देश
कार्रवाई के दौरान टीम ने बड़ी संख्या में कारोबारी दस्तावेज, हार्ड ड्राइव, लैपटॉप और डिजिटल साक्ष्यों को अपने कब्जे में लिया। इस पूरे मामले में कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने कंपनी के निदेशक इंद्रजीत सिंह उर्फ 'छोटू' को औपचारिक समंस जारी किया है। उन्हें 27 अगस्त को दुर्ग स्थित जीएसटी दफ्तर में जब्त दस्तावेजों और वित्तीय ब्योरों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
सालाना टर्नओवर 170 करोड़
एचटीसी परिवहन क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी मानी जाती है, जिसका सालाना टर्नओवर करीब 170 करोड़ रुपये है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के बेड़े में लगभग 1,500 भारी वाहन (ट्रक) शामिल हैं।
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500 वाहन: कंपनी के अपने स्वामित्व वाले हैं।
1000 वाहन: बाहरी मालिकों के हैं, जो अनुबंध (अटैच) पर चल रहे हैं।
मुख्य काम: इनमें से अधिकांश वाहनों का इस्तेमाल भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से जुड़े औद्योगिक माल की ढुलाई में किया जाता है।
पूरा दस्तावेज मिलने के बाद होगा सही आकलन
जांच अधिकारियों ने पाया कि एचटीसी से जुड़ी कम से कम तीन अन्य फर्मों के जरिए भी पैसों का लेन-देन किया जा रहा था। प्राथमिक पड़ताल में आय-व्यय के आंकड़ों में भारी अंतर और टैक्स बचाने के लिए खातों में हेरफेर करने के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम टैक्स देनदारी का सही आकलन पूरी जांच और दस्तावेजों के मिलान के बाद ही तय होगा। दो दिनीय छापेमारी के दौरान टीम ने पिछले 5 वर्षों के वित्तीय लेन-देन की गहन समीक्षा की।कागजात की गहराई से पड़ताल
इस दौरान कई ऐसी गाड़ियों की खरीद-बिक्री के मामले पकड़े गए, जिन पर नियम विरुद्ध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाया गया था। इसके अलावा, शुरुआती जांच में बोगस बिलिंग (फर्जी बिल) और बिना हिसाब-किताब के किए गए लेन-देन के दस्तावेज भी हाथ लगे हैं, जो सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की तरफ इशारा करते हैं।फिलहाल जीएसटी की तकनीकी टीम जब्त किए गए डिजिटल बैकअप और कागजात की गहराई से पड़ताल कर रही है।
कानूनी कार्रवाई होगी तय
कंपनी द्वारा अब तक जमा किए गए टैक्स, दावा किए गए ITC और वास्तविक बिक्री के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। निदेशक इंद्रजीत सिंह के बयान और पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई तय होगी।