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किसान रस्सी से ट्रैक्टर को खींच कर ले जाते
किसान रस्सी से ट्रैक्टर को खींच कर ले जाते
जगदलपुर (बस्तर)

बस्तर में हाहाकार : जब खेत छोड़ सड़क पर उतरे अन्नदाता, 5 KM रस्सी से ट्रैक्टर खींचकर जताया अनोखा विरोध

खरीफ सीजन की शुरुआत में बस्तर जिले के किसानों को डीजल, खाद और बीज की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। नारायणपाल, आड़ावाल और आसपास के गांवों के सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ बस्तर SDM कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान डीजल खत्म होने से बंद पड़े ट्रैक्टर को ग्रामीणों ने करीब 5 किलोमीटर तक खींचकर प्रशासन के सामने अपनी परेशानी जाहिर की।

कीर्तिमान न्यूज
03 Jun 2026, 12:14 PM
बस्तर

खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही बस्तर के किसानों की मुश्किलें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। मानसून की दस्तक के साथ जहां खेतों में रौनक होनी चाहिए थी, वहीं डीजल, खाद और बीज की किल्लत से जूझते किसानों का सब्र का बांध आखिरकार बुधवार को टूट गया। नारायणपाल, आड़ावाल और आसपास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतर आए और बस्तर एसडीएम कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया।

'सिस्टम' को आईना दिखाता एक बेबस दृश्य

प्रदर्शन के दौरान बस्तर की सड़कों पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दीं। खेत में जुताई के दौरान डीजल खत्म होने के कारण बंद पड़े एक ट्रैक्टर को ग्रामीणों ने लोहे की रस्सियों से बांधा और करीब 5 किलोमीटर तक पैदल खींचते हुए एसडीएम कार्यालय तक पहुंचाया। किसानों का यह अनोखा और दर्दनाक विरोध प्रदर्शन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहा।

"जब प्रशासन हमें खेतों तक डीजल ले जाने नहीं दे रहा, तो हमारे पास ट्रैक्टर को खींचकर साहब के दफ्तर तक लाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।" — प्रदर्शनकारी किसान

'नो जरकिन' नियम बना गले की हड्डी

किसानों का आरोप है कि क्षेत्र के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर जरकिन, कट्टों या प्लास्टिक के डिब्बों में डीजल देने से साफ इनकार किया जा रहा है।

  • व्यावहारिक समस्या: किसानों का कहना है कि वे भारी-भरकम ट्रैक्टरों और कृषि यंत्रों को बार-बार थ्रेसिंग और जुताई के बीच में छोड़कर पेट्रोल पंप नहीं ला सकते।

  • खेती प्रभावित: बारिश सिर पर है। खेतों को तैयार करने, पहली जुताई और थ्रोइंग के लिए डीजल की सख्त जरूरत है। अगर समय पर डीजल, खाद और उन्नत बीज नहीं मिले, तो पूरी फसल चक्र (Crop Cycle) बिगड़ जाएगी।

प्रशासन में हड़कंप, दिए गए निर्देश

1. एसडीएम की दखल: किसानों के इस उग्र प्रदर्शन और 'ट्रैक्टर खींचो' आंदोलन के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। बस्तर एसडीएम ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए तहसीलदार और खाद्य विभाग के अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई।

2. नियमों में ढील के संकेत: ताजा जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए हैं कि केवल कृषि कार्य के लिए आने वाले किसानों को पहचान पत्र (ऋण पुस्तिका या आधार कार्ड) देखकर सीमित मात्रा में जरकिन में डीजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि खेती का काम न रुके।

3. खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक: कृषि विभाग को सोसायटियों में खाद और बीज का बफर स्टॉक सुनिश्चित करने और निजी विक्रेताओं द्वारा की जा रही कालाबाजारी पर तत्काल छापेमारी करने के आदेश जारी किए गए हैं।

कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, खरीफ सीजन के शुरुआती 15 दिन बेहद संवेदनशील होते हैं। यदि इस दौरान जुताई और बुआई में देरी होती है, तो इसका सीधा असर फसल के उत्पादन (Yield) पर पड़ता है। बस्तर के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर सोसायटियों में खाद-बीज की किल्लत दूर नहीं हुई और डीजल की निर्बाध आपूर्ति शुरू नहीं हुई, तो वे उग्र चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।

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