मुंगेली जिले के जरहागांव में करंट लगने से एक युवक की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश सड़क पर देखने को मिला। मृतक के परिजनों, नागरिकों और भाजपा नेता वेदप्रकाश के नेतृत्व में लोगों ने जरहागांव बस स्टैंड पर नेशनल हाईवे जाम कर धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की। नगर निवासी गोविंद उर्फ गोलू को अचानक बिजली का करंट लग गया था। घटना के बाद परिजन उसे तुरंत इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जरहागांव लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो सके।
डॉक्टर नहीं मिलने का आरोप
परिजनों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के दौरान कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने प्राथमिक उपचार देने के बजाय मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। गंभीर हालत में परिजन उसे लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही गोविंद ने दम तोड़ दिया। युवक की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना है कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल चिकित्सा सुविधा और डॉक्टर उपलब्ध होते तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती थी। इसी मांग को लेकर लोगों ने देर रात सड़क पर उतरकर विरोध जताया। भाजपानेता के नेतृत्व में हाईवे पर चक्काजाम
घटना से नाराज परिजन, स्थानीय नागरिक और भाजपा नेता वेदप्रकाश (नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि) जरहागांव बस स्टैंड पहुंचे और नेशनल हाईवे पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। चक्काजाम के कारण हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।
प्रदर्शनकारियों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने घटना के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी गई। पुलिस की समझाइश के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी और जवान मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों ने धरना समाप्त किया और यातायात व्यवस्था सामान्य हो सकी।अस्पताल से नहीं आया जवाब
मामले में अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और इलाज में लापरवाही के लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इस मामले में विभाग का पक्ष जानने के लिए बीएमओ डॉ. कमलेश खैरवार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। प्रशासनिक जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।