नई शुरुआत : दो बच्चियों ने किया पुल का उद्घाटन, अबूझमाड़ के गांवों को मिली नई राह
नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास को नई गति मिली है। बासीन नाले पर बने पुल का लोकार्पण होने से दूरस्थ गांवों की आवाजाही आसान होगी और महाराष्ट्र से संपर्क मजबूत होगा। वहीं प्रशासन के अभियान से करीब 2000 बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़कर शिक्षा की मुख्यधारा में लाया गया है।
कीर्तिमान डेस्क
11 Jul 2026, 11:21 AM
नारायणपुर
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए आज का दिन विकास और शिक्षा के लिहाज से बेहद खास रहा। लंबे समय तक नक्सल समस्या और पिछड़ेपन के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। इसी कड़ी में बासीन नाले पर नवनिर्मित पुल का लोकार्पण किया गया, जिससे क्षेत्र के कई गांवों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, कलेक्टर नम्रता जैन सहित जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पुल का उद्घाटन किया गया। खास बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण परियोजना का शुभारंभ क्षेत्र की दो छोटी बच्चियों के हाथों कराया गया। जब बच्चियों ने शिलान्यास पट्टिका से कपड़ा हटाकर पुल का उद्घाटन किया तो मौजूद लोगों के बीच भावुक पल देखने को मिला।
दो छोटी बच्चियों के हाथों कराया उद्घाटनमहाराष्ट्र से आसान होगी आवाजाही
बासीन नाले पर पुल निर्माण के बाद अबूझमाड़ के कई दूरस्थ गांवों की जिला मुख्यालय नारायणपुर से दूरी कम हो जाएगी। ग्रामीणों को अब बरसात के दिनों में आवागमन की परेशानियों से राहत मिलेगी। इसके साथ ही यह पुल क्षेत्र को महाराष्ट्र से जोड़ने वाली एक अहम कड़ी भी साबित होगा, जिससे व्यापार, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। विकास कार्यों के साथ-साथ नारायणपुर प्रशासन ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया है। जिले में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में मंत्री केदार कश्यप की मौजूदगी में बड़ी संख्या में बच्चों का दोबारा स्कूलों में प्रवेश कराया गया।
शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े 2000 बच्चे
प्रशासन द्वारा किए गए सर्वे में ऐसे बच्चों की पहचान की गई थी, जिन्होंने विभिन्न कारणों से बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद अभियान चलाकर करीब 2000 बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस लाने का यह अभियान लगातार जारी है और आने वाले समय में इससे और अधिक बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है। अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्र में शिक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हो रहे इन प्रयासों को बदलाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।