घटना : ड्यूटी के दौरान CAF जवान ने सर्विस रायफल से दी जान
कोंडागांव जिले के उरंदाबेड़ा CAF कैंप में तैनात जवान जोगेंद्र नेताम ने ड्यूटी के दौरान अपनी सर्विस रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद कैंप और सुरक्षा महकमे में शोक का माहौल है। एसपी पंकज चंद्रा ने परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी और मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
कोंडागांव जिले के उरंदाबेड़ा स्थित CAF (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) कैंप से एक बेहद दुखद और संवेदनशील घटना सामने आई है। कैंप में तैनात जवान जोगेंद्र नेताम ने ड्यूटी के दौरान अपनी ही सर्विस रायफल से खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनते ही कैंप में अफरा-तफरी मच गई और साथी जवान तत्काल मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। जवान की मौत की खबर से पूरे कैंप सहित सुरक्षा महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एसपी पंकज चंद्रा ने परिजनों से की मुलाकात
कोंडागांव पुलिस अधीक्षक (एसपी) पंकज चंद्रा ने मृतक जवान के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। पुलिस प्रशासन की ओर से जवान के अंतिम संस्कार और अन्य औपचारिकताओं के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। एसपी पंकज चंद्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला निजी कारणों से मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने का प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
विस्तृत जांच के दिए गए निर्देश
मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उरंदाबेड़ा थाना प्रभारी को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस जवान के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों सहित अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है। कैंप में मौजूद जवानों और अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंपा जाएगा। जवान द्वारा यह आत्मघाती कदम उठाने के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी, इसका खुलासा जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हो सकेगा।
मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद सुरक्षा बलों में कार्यरत जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और परामर्श सेवाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले जवानों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।