सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को लेकर मचा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद मेटा की ओर से आधिकारिक सफाई दी गई है। मेटा ने स्पष्ट किया है कि कंपनी बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी सामग्री के खिलाफ सख्त नीति अपनाती है। कंपनी का कहना है कि वे इस तरह के कंटेंट के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं।
अपराधियों के खिलाफ जारी है जंग
मेटा के प्रवक्ता के अनुसार, वे लगातार उन अपराधियों के खिलाफ लड़ रहे हैं जो प्लेटफॉर्म के सिस्टम से बचने की कोशिश करते हैं। प्रवक्ता ने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म पर 3.5 अरब यूजर्स हैं, जिनमें से कुछ अपराधी छिपकर नियमों को तोड़ने की कोशिश करते हैं। कंपनी का दावा है कि वे अपनी सुरक्षा व्यवस्था को हर दिन मजबूत कर रहे हैं ताकि बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जा सके।
मंत्रालय ने तलब किए मेटा अधिकारी
यह विवाद तब शुरू हुआ जब इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के शोषण को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन देखे गए। इस मामले को सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि मेटा के अधिकारियों को तलब किया जाए। मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर इतने कड़े सुरक्षा दावों के बावजूद इस तरह के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे पहुंचे।सुरक्षा तकनीक पर सवाल
मेटा का कहना है कि वे नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट की पहचान करने के लिए विशेष तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, सरकार की सख्ती के बाद अब कंपनी को अपनी सुरक्षा प्रणाली को लेकर और अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा। आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या सोशल मीडिया कंपनियां अपने सुरक्षा दावों पर खरी उतर रही हैं या नहीं। फिलहाल पूरे मामले पर मंत्रालय की कार्रवाई का इंतजार है।