jagdalpur News: दो साल की बच्ची की श्वास नली में फंसा सेफ्टी पिन, डॉक्टरों ने बचाई जान
Bastar News: बस्तर जिले के मावलीबेड़ा में खेलते समय दो वर्षीय बच्ची ने सेफ्टी पिन निगल लिया। पिन उसकी सांस की नली में जाकर फंस गया, जिससे उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन बच्ची को तुरंत मेडिकल कॉलेज डिमरापाल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने दूरबीन पद्धति से पिन निकालकर उसकी जान बचाई।
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कीर्तिमान डेस्क | रोशनी पटेल
27 Aug 2026, 12:49 PM
जगदलपुर
बस्तर जिले के मावलीबेड़ा में खेलते समय दो वर्षीय बच्ची ने सेफ्टी पिन निगल लिया। पिन उसकी सांस की नली में जाकर फंस गया, जिससे उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन बच्ची को तुरंत मेडिकल कॉलेज डिमरापाल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने दूरबीन पद्धति से पिन निकालकर उसकी जान बचाई।
अचानक बिगड़ने लगी बच्ची की हालत
जानकारी के मुताबिक, दो वर्षीय मोनिका घर में खेल रही थी। इसी दौरान उसने पास में पड़ा सेफ्टी पिन मुंह में डालकर निगल लिया। सांस की नली में पिन फंसते ही उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उसकी हालत बिगड़ने लगी। बच्ची की स्थिति देखकर घबराए परिजन बिना देर किए उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।
जांच में सांस की नली में मिला पिन
मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने बच्ची की आवश्यक जांच की। जांच के दौरान सेफ्टी पिन सांस की नली में फंसा मिला। मामला गंभीर होने के कारण चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उसे निकालने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों की टीम ने सावधानीपूर्वक दूरबीन पद्धति का इस्तेमाल करते हुए बच्ची की सांस की नली से सेफ्टी पिन सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। समय रहते उपचार मिलने से उसकी जान बच गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्ची की हालत में सुधार बताया गया है।
बच्चों की पहुंच से दूर रखें छोटी वस्तुएं
घटना के बाद डॉक्टरों ने अभिभावकों से छोटे बच्चों पर लगातार नजर रखने की अपील की है। चिकित्सकों के अनुसार, सिक्के, पिन, बीज, बटन और छोटे खिलौने जैसी वस्तुएं बच्चों को खेलने के लिए नहीं देनी चाहिए। बच्चे इन्हें गलती से मुंह में डालकर निगल सकते हैं।
सांस की नली में फंस सकती हैं छोटी चीजें
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी वस्तु निगलने पर वह सांस की नली में फंस सकती है, जिससे बच्चे का दम घुटने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में घरेलू उपचार करने के बजाय बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। इलाज में देरी होने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।