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बोल्टन ने चेतावनी दी
बोल्टन ने चेतावनी दी
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ट्रंप की G2 थ्योरी पर भड़के जॉन बोल्टन : भारत को दरकिनार करना अमेरिका की सबसे बड़ी भूल, चीन को मिलेगा खुला मैदान

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार John Bolton ने राष्ट्रपति Donald Trump की कथित ‘G2’ (अमेरिका-चीन साझेदारी) सोच की कड़ी आलोचना की है। बोल्टन का कहना है कि चीन को साधने के प्रयास में भारत जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार की अनदेखी करना वॉशिंगटन के लिए गंभीर भूल साबित हो सकती है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 19 Jun 2026, 11:10 AM · अपडेट: 06 Oct 2026, 04:28 PM
वॉशिंगटन
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

अमेरिका की विदेश नीति में आ रहे बदलावों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'G2 फॉर्मूले' (अमेरिका-चीन साझेदारी) ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने ट्रंप प्रशासन के इस रुख पर तीखा हमला बोला है। बोल्टन ने चेतावनी दी है कि चीन को रिझाने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार को नजरअंदाज करना वॉशिंगटन के लिए आत्मघाती साबित होगा।

बोल्टन के बड़े आरोप

  • भारत को किनारे करना खतरनाक: बोल्टन के मुताबिक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को रोकने के लिए भारत-अमेरिका की दोस्ती रीढ़ की हड्डी है। भारत को दूर धकेलना बीजिंग को वॉकओवर देने जैसा है।

  • विदेश नीति में फेल हैं ट्रंप: पूर्व NSA ने साफ कहा कि ट्रंप सिर्फ 'व्यापारिक हितों' (Business Mindset) के चश्मे से दुनिया को देख रहे हैं, जो भू-राजनीतिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी नाकामी है।

  • चीन का आक्रामक रुख: बोल्टन ने ताइवान जलडमरूमध्य, दक्षिण चीन सागर और भारत के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन के आक्रामक रवैये का हवाला देते हुए कहा कि यह खतरा लगातार बड़ा हो रहा है।

क्या है ट्रंप की 'G2 थ्योरी' जिसने बढ़ाई चिंता?

डोनाल्ड ट्रंप का 'G2 फॉर्मूला' असल में दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों— अमेरिका और चीन— के बीच एक ऐसी साझेदारी की वकालत करता है, जिससे दोनों देश मिलकर वैश्विक व्यवस्था को चला सकें। इसे अनौपचारिक रूप से "दुनिया को दो हिस्सों में बांटने" की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

बड़ा बदलाव: हाल ही में अमेरिकी सैन्य हलकों से 'इंडो-पैसिफिक कमांड' के नाम से 'इंडो' (Indo) शब्द को हटाने की चर्चाओं ने इस अंदेशे को और हवा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करके अमेरिका बीजिंग को यह संदेश देना चाहता है कि वह चीन के खिलाफ कोई सख्त सैन्य धुरी नहीं बना रहा है।

भारत और अमेरिका के लिए इसके क्या मायने हैं?

क्षेत्रपुरानी नीति (Decades-old Policy)ट्रंप की नई 'G2' नीति का असर
चीन की स्थितिअमेरिका चीन को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक और आर्थिक प्रतिद्वंद्वी मानता था।चीन के साथ साझेदारी कर व्यापारिक और वैश्विक मुद्दों को सुलझाने की कोशिश।
भारत की भूमिकाभारत को इंडो-पैसिफिक का प्रमुख स्तंभ और 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' माना जाता था।भारत को नजरअंदाज कर व्यापारिक समझौतों को तरजीह दी जा रही है।
वैश्विक संतुलनएक बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था का समर्थन, जहां क्षेत्रीय शक्तियां मजबूत हों।द्विध्रुवीय (Bipolar) व्यवस्था की ओर झुकाव, जहां सिर्फ दो महाशक्तियां हों।

भारत के सामने खड़ी नई कूटनीतिक चुनौती

अमेरिका के इस यू-टर्न (यदि यह पूरी तरह लागू होता है) से भारत की 'बहुध्रुवीय एशिया नीति' (Multipolar Asia Policy) को गहरा झटका लग सकता है। भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि एशिया में किसी एक देश (विशेषकर चीन) का एकछत्र राज नहीं होना चाहिए।

अगर अमेरिका खुद को इस मोर्चे से पीछे खींचता है या चीन के साथ 'डील' कर लेता है, तो भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बनाए रखने के लिए नए सिरे से कूटनीति की बिसात बिछानी होगी। जॉन बोल्टन जैसे दिग्गजों का यह बयान साफ करता है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी ट्रंप की इस 'बिजनेस-फर्स्ट' नीति को लेकर भारी मतभेद हैं।

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