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चार देशों की अहम बैठक
चार देशों की अहम बैठक
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बढ़ीं अटकलें : क्या मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो की नींव पड़ रही है? काहिरा में चार देशों की अहम बैठक

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बीच मुस्लिम देशों के संभावित नए कूटनीतिक एवं सुरक्षा गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी संदर्भ में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार रविवार को मिस्र की राजधानी काहिरा पहुंचेंगे, जहां मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के विदेश मंत्री 'R-4' समूह की चौथी बैठक में हिस्सा लेंगे।

प्रकाशित: 20 Jun 2026, 05:07 PM · अपडेट: 15 Sep 2026, 11:22 AM
कायरो
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

मध्य-पूर्व के बदलते भू-राजनीतिक हालात और ईरान से जुड़े तनाव के बीच मुस्लिम देशों के एक नए कूटनीतिक गुट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसे 'इस्लामिक नाटो' के तौर पर देखा जा रहा है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार रविवार को मिस्र की राजधानी काहिरा पहुंच रहे हैं।

काहिरा में होने वाली यह बैठक किसी सामान्य द्विपक्षीय वार्ता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के विदेश मंत्री एक मंच पर जुटेंगे। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ये चारों देश मिलकर कोई ऐसा सुरक्षा ढांचा खड़ा कर रहे हैं, जो भविष्य में 'एक पर हमला, सब पर हमला' की तर्ज पर काम करेगा?

क्या है यह 'R-4' का पूरा गणित?

काहिरा में होने वाली यह बैठक 'R-4' समूह की चौथी कड़ी है। इस कूटनीतिक ढांचे की नींव इसी साल मार्च में रखी गई थी। जब से मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ी है, तब से इन चार देशों ने अपने संवाद को न केवल तेज किया है, बल्कि इसे संस्थागत रूप देने की कोशिश भी की है।

बैकग्राउंड: पाकिस्तान और सऊदी अरब पहले ही एक सैन्य समझौते के तहत बंधे हैं, जिसके तहत किसी भी बाहरी हमले की स्थिति में एक-दूसरे की मदद करना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि R-4 इसी सैन्य सहयोग का एक विस्तृत और बहुपक्षीय संस्करण हो सकता है।

इशाक डार का मिस्र दौरा और एजेंडा

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, मिस्र के विदेश मंत्री डॉ. बद्र अब्देलत्ती के निमंत्रण पर इशाक डार 21 जून को काहिरा में होंगे। इस यात्रा के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े मकसद हैं:

  • क्षेत्रीय सुरक्षा: ईरान और मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति पर साझा रणनीति बनाना।

  • कूटनीतिक समन्वय: चारों देशों के बीच शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक मजबूत मंच तैयार करना।

  • द्विपक्षीय वार्ता: डार की मिस्र के विदेश मंत्री और राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ मुलाकात भी प्रस्तावित है, जिसमें आपसी व्यापार और रक्षा संबंधों को प्राथमिकता दी जाएगी।

चर्चा क्यों तेज है?

इस बैठक को 'इस्लामिक नाटो' की आहट के तौर पर इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि इन चारों देशों की सैन्य और आर्थिक ताकत अगर एक साथ आती है, तो यह वैश्विक राजनीति में एक नया ध्रुव (pole) तैयार कर सकती है। हालांकि, आधिकारिक बयानों में इसे 'शांति, सुरक्षा और स्थिरता' के लिए प्रतिबद्धता बताया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के जवाब में एक सुरक्षा कवच के रूप में देख रहे हैं।

आने वाले दिनों में इस बैठक से जो निष्कर्ष निकलेंगे, वे स्पष्ट कर देंगे कि क्या यह केवल विचार-विमर्श का मंच है या वास्तव में कोई बड़ा सैन्य गठबंधन आकार ले रहा है। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें काहिरा की इस अहम बैठक पर टिकी हैं।

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