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एडवर्ड पार्क में जारी निर्माण कार्य
एडवर्ड पार्क में जारी निर्माण कार्य
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई

खैरागढ़ के एडवर्ड पार्क मामले में प्रशासनिक आदेशों की उड़ रही धज्जियां, नोटिस के बाद भी डीपीसी लेवल तक पहुंचा अवैध निर्माण

खैरागढ़ के ऐतिहासिक एडवर्ड पार्क क्षेत्र में जांच समिति के स्थगन आदेश और नगर पालिका के नोटिस के बावजूद निर्माण जारी रहने के आरोप हैं। निगरानी के लिए कर्मचारियों की टीम तैनात होने के बाद भी काम आगे बढ़ने से नगर पालिका की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 23 Aug 2026, 01:10 PM · अपडेट: 12 Oct 2026, 12:20 AM
खैरागढ़
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
ऐतिहासिक एडवर्ड पार्क क्षेत्र में प्रशासन और नगर पालिका के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। जिस स्थल पर दो महीने पहले नगर पालिका ने 'यथास्थिति' (स्टैटस को) का नोटिस चिपकाया था और उस वक्त महज नींव के कॉलम ढले थे, वहां अब निर्माण डीपीसी लेवल (DPC Level) तक पहुंच चुका है। जब मौके पर पांच-पांच कर्मचारियों की टीम तैनात है, तब प्रशासन की नाक के नीचे यह निर्माण किसकी शह पर हो रहा है, यह बड़ा सवाल बन गया है। राजनांदगांव-कवर्धा मार्ग पर सिविल कोर्ट के ठीक सामने स्थित खसरा नंबर 167, 169, 170 और नजूल भूखंड क्रमांक 114 व 115 पर अवैध प्लॉटिंग की शिकायत हुई थी। 

हाथ पर हाथ धरे बैठी पालिका 

जांच में प्रथमदृष्टया गड़बड़ी की पुष्टि होने पर सितंबर 2025 में ही नगर पालिका को कलेक्टर से मंजूरी लेकर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी नगर पालिका हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। मामले में लगातार उठते सवालों के बीच कमिश्नर के निर्देश पर एडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई। समिति ने 12 जून को मौके पर पहुंचकर नोटिस चस्पा किया और स्पष्ट ताकीद दी कि जांच रिपोर्ट आने तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रहेगा। 

निर्माण पर खामोशी से हो रहा संदेह

नोटिस में एनओसी की कंडिका 15 का हवाला देते हुए चेताया गया था कि अवैध प्लॉटिंग साबित होने पर एनओसी तत्काल निरस्त मानी जाएगी। नियमानुसार नगरीय निकाय क्षेत्र में निर्माण से पहले मिली एनओसी केवल एक वर्ष के लिए मान्य होती है। कंडिका 8 के तहत समय सीमा समाप्त होने पर नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। बताया जा रहा है कि एडवर्ड पार्क से जुड़ी अधिकांश एनओसी वर्ष 2023-24 में जारी की गई थीं। ऐसे में मियाद खत्म होने के बावजूद बिना नवीनीकरण या शर्तों का उल्लंघन कर हो रहे निर्माण पर नगर पालिका की खामोशी संदेह पैदा कर रही है। 

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश 

चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण रोकने के लिए नगर पालिका ने बाकायदा पांच कर्मचारियों की एक विशेष टीम मौके पर तैनात कर रखी है। 18 अगस्त को पालिका ने दोबारा नोटिस जारी कर काम बंद रखने का फरमान सुनाया। इसके बावजूद मौके पर तस्वीरें कुछ और ही बयां कर रही हैं। कर्मचारियों की मौजूदगी के बाद भी ईंट दर ईंट दीवारें उठ रही हैं, जिससे पालिका की नीयत और निगरानी व्यवस्था दोनों कटघरे में हैं। नगर पालिका की इस दोहरी नीति से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। 

ठेला-गुमटी वालों पर चल रहा जेसीबी 

नागरिकों का कहना है कि कुछ ही समय पहले एडवर्ड पार्क के सामने से यातायात में बाधा का हवाला देकर छोटे-मोटे ठेले-गुमटी वालों की रोजी-रोटी पर रातों-रात जेसीबी चला दी गई थी। वहीं दूसरी ओर, जांच समिति के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद रसूखदारों का पक्का निर्माण दिन-का-दिन बढ़ता जा रहा है। जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है कि नगर पालिका का बुलडोजर सिर्फ गरीबों के लिए चलता है या कानून रसूखदारों पर भी लागू होगा?
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