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मौत का जाल बनी बिल्डिंग
मौत का जाल बनी बिल्डिंग
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कोचिंग सेंटर अग्निकांड : एक सीढ़ी, कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं, 15 बच्चे चढ़े लालच की भेंट 

लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में 15 छात्रों और प्रशिक्षुओं की मौत ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की गंभीर पोल खोल दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन में केवल एक संकरी सीढ़ी थी, कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था और अग्निशमन उपकरणों का भी अभाव था।

कीर्तिमान न्यूज
23 Jun 2026, 11:10 AM
लखनऊ

लखनऊ के अलीगंज से आई इस खबर ने पूरे देश को दहला दिया है। एक कोचिंग सेंटर में भड़की मामूली सी आग देखते ही देखते काल बन गई और 15 मासूम जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं। इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि चंद पैसों के लालच में मासूमों की सुरक्षा को दांव पर लगाना कितना भारी पड़ सकता है। शुरुआती जांच में जो सच सामने आया है, उसे सुनकर किसी का भी खून खौल उठे।

मौत का जाल बनी बिल्डिंग: न रास्ता, न बचाव का साधन

जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में यह कोचिंग सेंटर चल रहा था, वह किसी मौत के कुएं से कम नहीं थी। आग लगने की स्थिति में बच्चों के पास भागने या खुद को बचाने का कोई रास्ता ही नहीं था।

  • एकमात्र सीढ़ी: पूरी बिल्डिंग में ऊपर जाने और नीचे आने के लिए सिर्फ एक ही पतली सीढ़ी थी। जब आग लगी, तो भगदड़ मच गई और वही इकलौता रास्ता धुएं और लपटों से घिर गया।

  • इमरजेंसी एग्जिट गायब: सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई इस बिल्डिंग में कोई भी आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) नहीं था।

  • दम घुटने से मौत: जान बचाने की जद्दोजहद में कुछ बच्चे वॉशरूम की तरफ भागे और खुद को अंदर बंद कर लिया। उन्हें लगा कि शायद वहां पानी होने की वजह से वे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन जहरीले धुएं ने उन्हें वहां भी नहीं छोड़ा। दम घुटने के कारण कई बच्चों ने वहीं तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

आवासीय परिसर में मौत का कारोबार

इस पूरे मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की भूमिका और बिल्डिंग मालिक की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कागजों पर जिस बिल्डिंग को सिर्फ रहने (आवासीय उपयोग) के लिए पास कराया गया था, उसमें धड़ल्ले से कमर्शियल एक्टिविटी चल रही थी और सैकड़ों बच्चों का भविष्य और जीवन दांव पर लगा था। सुरक्षा के नाम पर यहां एक फायर एक्स्टिंग्विशर (आग बुझाने वाला सिलेंडर) तक मौजूद नहीं था।

SIT करेगी गुनहगारों का हिसाब

हादसे का शिकार हुए ज्यादातर लोग युवा छात्र और इंटर्नशिप के लिए आए ट्रेनी थे, जो अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर लखनऊ आए थे। इस वीभत्स घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि SIT की रिपोर्ट आते ही बिल्डिंग मालिक और कोचिंग संचालक के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इन लापरवाहों को सजा मिलने से उन मां-बाप की गोद फिर हरी हो पाएगी, जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को हमेशा के लिए खो दिया है?

जिले में भी ऐसे सेंटरों की कमी नहीं 

ऐसा ही हाल जिले के काई कोचिंग सेंटरों का है जहां सुरक्षा उपकरण के नाम पर कुछ भी नहीं है। कोचिंग सेंटर ऐसे जगहों पर है जहां से आने जाने का रास्त भी छोटा और सकरा है।  जहां कभी भी हादसा हो सकता है जिसे रोकने के लिए विभाग ना तो जांच कर रही ना ही किसी प्रकार की कार्रवाई। शायद यहां भी काई बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा।  

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