गुजरात का राजकोट शहर इन दिनों पूरी तरह भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। मौका था बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर सरकार) की दो दिवसीय भव्य हनुमान कथा और एक दिवसीय श्री बालाजी भगवान के दिव्य दरबार का। इस आध्यात्मिक समागम में श्रद्धा और विश्वास का ऐसा सैलाब उमड़ा कि कथा स्थल छोटा पड़ गया। लाखों की संख्या में पहुँचे श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा राजकोट गुंजायमान हो उठा।
आयोजन के सबसे मुख्य आकर्षण 'दिव्य दरबार' के दौरान भक्तों का उत्साह चरम पर था। देश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बालाजी महाराज के चरणों में अपनी अर्जी लगाई। हमेशा की तरह अपने चिर-परिचित अंदाज में बागेश्वर सरकार ने भक्तों को नाम से पुकारा और बिना बताए ही उनकी समस्याओं को एक पर्चे पर लिख दिया। भक्तों का दावा है कि बालाजी की कृपा से पर्चे के माध्यम से उनकी जटिल से जटिल समस्याओं का सटीक समाधान और मार्गदर्शन मिला, जिसे देखकर वहाँ मौजूद जनसमूह भावविभोर हो गया।
जब मोबाइल टॉर्च से हुई 'डिजिटल आरती'
इस तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के समापन और विराम के अवसर पर एक ऐसा अद्भुत और भावुक दृश्य देखने को मिला, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। हनुमान जी की महाआरती के समय बागेश्वर सरकार ने व्यासपीठ से सामने बैठे लाखों श्रद्धालुओं से एक अनोखा आह्वान किया।
"आज तकनीक और आस्था का मिलन होगा। सभी भक्त अपने-अपने मोबाइल फोन की टॉर्च चालू करें, आज हम सब मिलकर 'हनुमान दादा की डिजिटल आरती' करेंगे।"
— धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर सरकार)
दूधिया रोशनी से नहा उठा पंडाल
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आह्वान होते ही पलक झपकते ही पूरे विशाल मैदान में मौजूद लाखों भक्तों ने अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन कर दी। देखते ही देखते पूरा कथा स्थल श्वेत (दूधिया) रोशनी से जगमगा उठा। दूर-दूर तक फैली मोबाइल की रोशनी ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो आसमान के सारे सितारे राजकोट की धरती पर उतर आए हों। इस अलौकिक प्रकाश के बीच जब 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के गगनभेदी जयकारे लगे, तो पूरा माहौल दिव्य ऊर्जा से भर गया।
आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम
परंपरागत रूप से होने वाली आरती में इस बार आधुनिक तकनीक का यह समावेश चर्चा का विषय बना रहा। उपस्थित बुद्धिजीवियों और श्रद्धालुओं का कहना था कि यह दृश्य श्रद्धा, सनातन आस्था और आधुनिकता के अद्भुत समन्वय का प्रतीक है। सोशल मीडिया पर भी इस 'डिजिटल आरती' के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।आयोजन समिति के अनुसार, राजकोट के इस भव्य समागम में न केवल गुजरात बल्कि पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश से भी भारी संख्या में वीआईपी और आम श्रद्धालु पहुँचे थे।स द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बागेश्वर सरकार का यह चमत्कारी दरबार और अनोखी 'डिजिटल आरती' राजकोट के इतिहास में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
