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मनरेगा का नया नाम और ज्यादा फायदा
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मनरेगा का नया नाम और ज्यादा फायदा : आज से देश में लागू हुआ नया रोजगार कानून, अब साल में मिलेंगे 125 दिन काम

केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कथित तौर पर नया रोजगार कानून लागू करने का दावा किया है, जिसके तहत मनरेगा की जगह नई योजना लाकर सालाना रोजगार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने और मजदूरी बढ़ाने की बात कही गई है।

विशेष संवाददाता
01 Jul 2026, 11:44 AM
नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने आज यानी बुधवार से देशभर के ग्रामीण इलाकों के लिए एक बड़ा और नया रोजगार कानून लागू कर दिया है। इस नए कानून को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण नाम दिया गया है। यह नया कानून पुरानी चली आ रही मनरेगा योजना की जगह लेगा। नए नियमों के तहत अब ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों को साल में सौ दिन की जगह एक सौ पच्चीस दिन के काम की कानूनी गारंटी दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने मजदूरों की दिहाड़ी में भी बढ़ोतरी की है।

मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ी और राज्यों को मिला भारी बजट

इस नए कानून के लागू होने के साथ ही देशभर में मिलने वाली औसत दिहाड़ी को दो सौ निन्यानवे रुपये से बढ़ाकर लगभग तीन सौ सत्ताइस रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब मजदूरों को हर दिन करीब अट्ठाईस रुपये ज्यादा मिलेंगे। केंद्र सरकार ने इस योजना को सही तरीके से चलाने और मजदूरों को समय पर पैसा देने के लिए
अब 125 दिनों का रोजगार
राज्यों को पंचा commercial नवे हजार छह सौ बयानवे करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट भी जारी कर दिया है। इस योजना की शुरुआत दो जुलाई को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले से की जाएगी, जहां ग्रामीणों को नए रोजगार गारंटी कार्ड बांटे जाएंगे।

पुराने जॉब कार्ड से भी मिलता रहेगा काम

सरकार ने साफ किया है कि जिन लोगों के पुराने जॉब कार्ड का ईकेवाईसी यानी पहचान का सरकारी सत्यापन हो चुका है, वे नया कार्ड मिलने तक पुराने कार्ड से ही काम पा सकेंगे। इसमें किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। पहले की तरह ही ग्राम पंचायतें ही तय करेंगी कि गांव में क्या काम होना है। इस बार पानी बचाने, खेती का विकास करने, गांव की सड़कें सुधारने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले कामों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। देश के चौबीस राज्यों ने इस योजना को लेकर अपनी तैयारी पूरी कर ली है।

पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र देगा नब्बे प्रतिशत पैसा

इस नई योजना पर होने वाले खर्च को केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर उठाएंगी। सामान्य राज्यों में साठ प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देगी और चालीस प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को उठाना होगा। हालांकि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में नब्बे प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार खुद उठाएगी और केवल दस प्रतिशत खर्च वहां की सरकारों को करना होगा। इस कानून में एक खास नियम यह भी है कि जब गांवों में खेती की बुवाई या कटाई का सीजन होगा, तब राज्य सरकारें साल में अधिकतम साठ दिनों के लिए इस सरकारी काम को रोक सकेंगी ताकि खेती प्रभावित न हो।
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