जरा सोचिए, एक ऐसा रोबोट जो महज एक छोटे से बीज के बराबर है, लेकिन डॉक्टर इसकी मदद से बिना कोई बड़ा चीरा लगाए आपके शरीर के अंदर का जटिल ऑपरेशन कर सकते हैं! यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस की हकीकत बन चुका है।
सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU) के रिसर्चर्स ने एक ऐसा ही 'मिनिएचर सर्जिकल रोबोट' तैयार किया है, जो चिकित्सा जगत में एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
आकार सिर्फ 4.4 मिमी, लेकिन रफ्तार और काम बेमिसाल
यह रोबोट सिर्फ 4.4 मिलीमीटर लंबा है, लेकिन इसकी काबिलियत हैरान करने वाली है। यह रोबोट 1 सेकंड से भी कम समय में 5 अलग-अलग काम कर सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसे ऑपरेट करने के लिए शरीर में कोई तार नहीं डालना पड़ता; इसे हल्के मैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय क्षेत्र) के जरिए बाहर से ही रिमोट की तरह कंट्रोल किया जाता है।
एक साथ करेगा ये 5 बड़े काम
आमतौर पर इतने छोटे रोबोट सिर्फ एक या दो काम ही कर पाते हैं, लेकिन NTU का यह नया आविष्कार बेहद वर्सटाइल है। यह शरीर के नाजुक हिस्सों में जाकर निम्नलिखित काम आसानी से कर सकता है:
शरीर की बेहद नरम और संवेदनशील सतहों पर आसानी से रेंगना या चलना।
जैविक ऊतकों (Biological Tissues) को सटीकता से काटना।
शरीर के प्रभावित हिस्से या टारगेटेड ऑर्गन तक दवाएं (Targeted Drug Delivery) पहुंचाना।
शरीर के अंदर मौजूद मांस के छोटे टुकड़े या ट्यूमर को पकड़ना।
उस टुकड़े को सुरक्षित तरीके से शरीर से बाहर निकालना (Biopsy)।
एसोसिएट प्रोफेसर लुम गुओ जान ने बताया, "माइक्रो-रोबोटिक्स के क्षेत्र में यह एक बहुत बड़ी चुनौती थी कि छोटे रोबोट कई काम नहीं कर सकते थे। हमारा नया आविष्कार इस चुनौती को खत्म करता है। हमारा अंतिम लक्ष्य डॉक्टरों को एक ऐसा टूल देना है, जिससे वे बिना बड़ी सर्जरी के शरीर के अंदरूनी हिस्सों का सटीक इलाज कर सकें।"
इंसानी शरीर के लिए 99% सुरक्षित
इस रोबोट को बनाने में जिस मटीरियल का इस्तेमाल हुआ है, वैज्ञानिकों ने उसकी सुरक्षा की भी कड़ी जांच की है। जब इसे इंसानी त्वचा की कोशिकाओं (Human Skin Cells) पर टेस्ट किया गया, तो पाया गया कि 99% से ज्यादा कोशिकाएं पूरी तरह सुरक्षित और जीवित रहीं। यानी लैब टेस्टिंग में यह साबित हो चुका है कि यह रोबोट इंसानी शरीर के लिए बिल्कुल भी जहरीला या नुकसानदेह नहीं है।सर्जनों के साथ मिलकर तैयारी
इस ऐतिहासिक शोध को प्रतिष्ठित साइंटिफिक जर्नल 'एडवांस्ड मटीरियल्स' (Advanced Materials) में प्रकाशित किया गया है। अब रिसर्चर्स की टीम इस रोबोट को मेडिकल इमेजिंग सिस्टम (जैसे एक्स-रे या एमआरआई) और एडवांस्ड सेंसर्स के साथ जोड़ने पर काम कर रही है। इसके साथ ही, भविष्य में होने वाले क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए एक्सपर्ट सर्जनों से भी सलाह ली जा रही है ताकि जल्द से जल्द इसे मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।
