मध्यप्रदेश के जबलपुर से सरकारी सिस्टम को हिलाकर रख देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से खरीदे गए सरकारी गेहूं के भंडारण में करोड़ों के हेरफेर की आशंका है।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, शहर के दो बड़े गोदामों—अन्नपूर्णा और मां नर्मदा वेयरहाउस—से करीब 1000 टन (लगभग 10 लाख किलोग्राम) सरकारी गेहूं रहस्यमयी तरीके से गायब हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि इस भारी कमी को छिपाने के लिए बाकायदा एक सोची-समझी साजिश रची गई।
कागजनों पर गेहूं की अदला-बदली
जांच में सामने आया है कि स्टॉक की कमी पर पर्दा डालने के लिए दूसरे गोदामों के रिकॉर्ड्स में हेराफेरी की गई और कागजों पर ही गेहूं की 'अदला-बदली' दिखा दी गई, ताकि फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) के समय पकड़े न जाएं। जैसे ही इस 'गेहूं घोटाले' की भनक राजधानी को लगी, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया।
जिम्मेदारों की उड़ी नींद
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के कड़े रुख के बाद अब इस पूरे मामले की जांच के लिए भोपाल से अधिकारियों की एक विशेष टीम जबलपुर के लिए रवाना हो रही है। मंत्री ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, जिसके बाद से स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों और वेयरहाउस संचालकों की नींद उड़ी हुई है।
बड़े अधिाकारियरों की मिलीभगत की आशंका
सरल शब्दों में कहें तो, जब एक गोदाम से अनाज गायब हो जाता है, तो अधिकारी पकड़े जाने के डर से दूसरे गोदाम के ऑन-रिकॉर्ड स्टॉक को डिजिटल या कागजी तौर पर इस गोदाम के नाम ट्रांसफर कर देते हैं। इससे कागजों में तो स्टॉक पूरा दिखता है, लेकिन हकीकत में अनाज गायब होता है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में उपार्जन समिति से जुड़े कुछ बड़े अधिकारियों और वेयरहाउस प्रबंधन की मिलीभगत की पूरी आशंका है। भोपाल से आ रही टीम जल्द ही संबंधित अधिकारियों को तलब कर पूछताछ शुरू करेगी।
एफआईआर दर्ज, जेल भेजने की तैयारी
जानकारों का कहना है कि यदि फिजिकल ऑडिट में यह गड़बड़ी पूरी तरह प्रमाणित हो जाती है—जिसकी गुंजाइश सबसे ज्यादा है—तो न सिर्फ वेयरहाउस संचालकों का लाइसेंस रद्द होगा, बल्कि धांधली में शामिल सरकारी बाबुओं और अफसरों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर सीधे जेल भेजने की तैयारी है। फिलहाल इस बड़ी कार्रवाई को लेकर जबलपुर के खाद्य विभाग में सन्नाटा पसरा हुआ है।