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प्रदेश में हाई अलर्ट जारी
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निपाह की दस्तक : कोझिकोड में इस साल का पहला मामला, राज्यभर में हाई अलर्ट, वेंटिलेटर पर मरीज

केरल के कोझिकोड जिले में वर्ष 2026 का पहला निपाह वायरस संक्रमित मरीज मिलने के बाद पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। 43 वर्षीय संक्रमित व्यक्ति की हालत गंभीर है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। प्रारंभिक जांच में गोदाम की सफाई के दौरान संक्रमित चमगादड़ों के संपर्क में आने की आशंका जताई गई है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 11 Jun 2026, 01:32 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 03:14 AM
तिरुवनंतपुरम
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

केरलम में एक बार फिर खतरनाक निपाह वायरस ने दस्तक दे दी है। इस साल (2026) का पहला सकारात्मक मामला कोझिकोड से सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तुरंत हरकत में आते हुए पूरे प्रदेश में 'हाई अलर्ट' जारी कर दिया है।

संक्रमित मरीज की उम्र 43 वर्ष है और वह कोझिकोड का रहने वाला है। फिलहाल मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।

मरीज को शुरुआत में हल्का बुखार आने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए उसे तुरंत कोझिकोड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंपल की जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

संक्रमण की वजह: एक गोदाम की सफाई

शुरुआती जांच और अधिकारियों के मुताबिक, मरीज ने हाल ही में एक पुराना गोदाम किराए पर लिया था और खुद उसकी सफाई की थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी सफाई के दौरान वह वायरस के मुख्य स्रोत, यानी फ्रूट बैट्स (फल खाने वाले चमगादड़ों) या उनके मल-मूत्र के संपर्क में आया।

स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन का बयान: > "मरीज कई लोगों के संपर्क में आया था। अस्पताल के स्टाफ और उसके संपर्क में आए सभी संभावित लोगों को तुरंत क्वारंटीन (एकांतवास) में रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और फिलहाल आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।"

एक्शन में सरकार: अब आगे क्या?

संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है:

  • रूट मैप तैयार: मरीज पिछले कुछ दिनों में कहां-कहां गया, इसका पूरा रूट मैप बनाया जा रहा है।

  • कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग: मरीज के संपर्क में आए हाई-रिस्क और लो-रिस्क लोगों की पहचान कर उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है।

  • NIV की फाइनल रिपोर्ट: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की अंतिम विस्तृत रिपोर्ट और गाइडलाइंस के आधार पर आगे के कड़े कदम तय किए जाएंगे।

केरलम और निपाह का पुराना नाता 

साल 2018 के बाद से केरलम में यह छठी बार है जब निपाह वायरस का संक्रमण फैला है। इससे पहले:

  • साल 2024 (दो साल पहले): राज्य में निपाह के दो मामले सामने आए थे, जिनमें से एक मरीज की मौत हो गई थी।

  • पैटर्न: केरलम के कोझिकोड और आसपास के इलाके भौगोलिक रूप से इस वायरस के प्रति संवेदनशील रहे हैं, जहां चमगादड़ों की मौजूदगी अधिक है।

निपाह वायरस का इतिहास: वैश्विक से भारत तक का सफर

मलेशिया में पहली पहचान 

  • निपाह वायरस की पहचान पहली बार साल 1998-99 में मलेशिया के 'सुंगाई निपाह' गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इसका नामकरण हुआ।

  • सूअरों से फैला संक्रमण: यह वायरस चमगादड़ों से सूअरों में और फिर सूअरों के फार्म में काम करने वाले इंसानों में फैला।

  • भारी नुकसान: मलेशिया में लगभग 265 लोग संक्रमित हुए, जिनमें से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। संक्रमण रोकने के लिए सरकार को 10 लाख से अधिक सूअरों को मारना पड़ा, जिससे वहां की पोर्क इंडस्ट्री पूरी तरह तबाह हो गई थी।

  • इसके बाद यह वायरस बांग्लादेश, भारत, सिंगापुर, फिलीपींस, कंबोडिया और थाईलैंड जैसे 6 अन्य देशों में भी पहुंचा।

भारत में निपाह का इतिहास 

  • 2001 (सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल): भारत में पहली बार निपाह का प्रकोप देखा गया। तब 66 मामले आए थे, जिनमें से 45 मरीजों की मौत हो गई थी (मृत्यु दर बेहद डरावनी थी)।

  • 2007 (नादिया, पश्चिम बंगाल): पांच मामले सामने आए और सभी पांचों मरीजों की मौत हो गई।

  • 2018 (केरलम में एंट्री): 2018 में निपाह ने पहली बार केरलम में दस्तक दी और तब से लेकर पिछले 8 सालों में यह छठी बार है जब राज्य में इसके मामले दर्ज किए गए हैं।

भारत और मलेशिया के संक्रमण पैटर्न में बड़ा अंतर

विशेषतामलेशिया का पैटर्न (1998)भारत/बांग्लादेश का पैटर्न
मुख्य वाहकचमगादड़ ➡️ सूअर ➡️ इंसानचमगादड़ ➡️ सीधे इंसान (या फलों के जरिए)
आर्थिक प्रभावपोर्क इंडस्ट्री को भारी नुकसान हुआकृषि और स्थानीय फलों (जैसे ताड़ी या खजूर का रस) पर कड़ा नियंत्रण रखना पड़ा
बचाव ही उपाय: प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पेड़ों से गिरे या चमगादड़ द्वारा कुतरे गए फलों को बिल्कुल न खाएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
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