वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के बीच, आज भी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ईंधन की आसमान छूती कीमतों से त्रस्त है। भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों में पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel) के दाम आम आदमी के मासिक बजट का दम निकाल रहे हैं। भारत के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल की कीमत लंबे समय से ₹100 प्रति लीटर के पार बनी हुई है, जिसके कारण मिडिल क्लास तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और सीएनजी (CNG) की तरफ शिफ्ट हो रहा है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैश्विक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) के इस दौर में भी दुनिया के कुछ कोने ऐसे हैं, जहाँ पेट्रोल की कीमत मिनरल वाटर की एक बोतल से भी कई गुना कम है? वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों पर पैनी नजर रखने वाली संस्था 'ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेस' (Global Petrol Prices) की नवीनतम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। इन देशों में ईंधन इतना सस्ता है कि जितने रुपये में आप भारत में एक लीटर पीने का साफ पानी खरीदते हैं, उतने में वहाँ गाड़ियों के टैंक फुल हो जाते हैं।
नंबर-1 पर लीबिया: ₹2.30 में एक लीटर पेट्रोल!
दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले देशों की सूची में उत्तर अफ्रीका का प्रमुख तेल उत्पादक देश लीबिया (Libya) शीर्ष पर काबिज है।
ताजा कीमत: लीबिया में एक लीटर पेट्रोल की कीमत भारतीय मुद्रा में मात्र ₹2.30 के करीब है।
सस्ते का कारण: लीबिया के पास कच्चे तेल का विशाल भंडार है। वहाँ की सरकार घरेलू स्तर पर ईंधन पर भारी-भरकम सब्सिडी देती है।
दिलचस्प तुलना: यदि आप लीबिया में किसी टू-व्हीलर की 10 लीटर की टंकी को फुल कराते हैं, तो आपकी जेब से महज ₹23 खर्च होंगे। यह भारत में मिलने वाली पानी की एक साधारण रेल नीर या बिसलेरी की बोतल की कीमत के बराबर है।
पाबंदियों के बीच कौड़ियों के भाव तेल
लीबिया के बाद इस कतार में ईरान (Iran) और वेनेजुएला (Venezuela) जैसे भारी तेल भंडार वाले देश मजबूती से खड़े हैं।
1. ईरान
पश्चिम एशिया के इस शक्तिशाली देश में एक लीटर पेट्रोल की कीमत भारतीय रुपए में करीब ₹2.78 के आसपास बैठती है।
2. वेनेजुएला
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला, जो किसी समय दुनिया में सबसे सस्ता तेल बेचने के लिए मशहूर था, आर्थिक संकट और अपनी करेंसी (बोलिवर) के अवमूल्यन के बाद अब तीसरे स्थान पर आ गया है। यहाँ पेट्रोल की कीमत करीब ₹3.35 प्रति लीटर है।
क्यों है यहाँ इतना सस्ता? ईरान और वेनेजुएला दोनों ही देशों के पास कच्चे तेल का अथाह भंडार है। लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) के कारण ये देश अंतरराष्ट्रीय बाजार में खुलकर अपना तेल नहीं बेच पाते। नतीजतन, ये देश अपने घरेलू बाजार में ईंधन की खपत को बनाए रखने और जनता के गुस्से से बचने के लिए इसे नाममात्र के दामों पर बेचते हैं।
अन्य सस्ते देशों की सूची
शीर्ष तीन देशों के अलावा कुछ अन्य तेल उत्पादक देश भी हैं, जहाँ की कीमतें भारत के मुकाबले बेहद कम हैं:
| देश का नाम | अनुमानित कीमत (भारतीय रुपये में) |
| अंगोला | ₹31 - ₹32 प्रति लीटर |
| अल्जीरिया | ₹32 - ₹33 प्रति लीटर |
| कुवैत | ₹33 - ₹34 प्रति लीटर |
भारत में ₹100+ और वहाँ ₹3 क्यों?
अंतरराष्ट्रीय बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में यह जमीन-आसमान का अंतर पूरी तरह से तीन कारकों पर निर्भर करता है: घरेलू नीतियां, टैक्स स्ट्रक्चर और सरकारी सब्सिडी।
आयात पर निर्भरता बनाम आत्मनिर्भरता: भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और वैश्विक रिफाइनिंग कॉस्ट भारत में बेस प्राइस को बढ़ा देती है। इसके विपरीत, खाड़ी और अफ्रीकी देश अपनी ही जमीन से निकले 'काले सोने' का इस्तेमाल करते हैं।
टैक्स का खेल: भारत में बेस प्राइस पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) और राज्य सरकारें भारी मात्रा में वैट (VAT) वसूलती हैं। इसके ऊपर डीलर का कमीशन और माल ढुलाई का खर्च जुड़ने से अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते कीमत ₹100 के पार हो जाती है।
सब्सिडी का सुरक्षा कवच: खाड़ी देश और तेल निर्यातक (OPEC) देश अपने नागरिकों को खुश रखने और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए टैक्स वसूलने के बजाय अपनी जेब से भारी सब्सिडी देते हैं, जिससे वहाँ पेट्रोल पानी से भी सस्ता बना हुआ है।
