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तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर
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सियासी उलटफेर : एमडीएमके ने तोड़ा डीएमके से 9 साल पुराना नाता, विजय सरकार के समर्थन के संकेत

एमडीएमके के इस अलगाव के संकेत पहले ही मिल चुके थे, जब पार्टी ने टीवीके सरकार के विश्वास मत के दौरान मतदान से दूरी बना ली थी। इसके बाद एमडीएमके प्रमुख वाइको और उनके बेटे दुरई वाइको ने मुख्यमंत्री विजय और टीवीके के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई बैठकें भी की थीं। एमडीएमके के बाहर निकलने के बाद अब कांग्रेस और वीसीके जैसी पार्टियां सत्ताधारी टीवीके के साथ खड़ी नजर आ रही हैं, जबकि वामपंथी पार्टियां बाहर से सरकार को अपना समर्थन दे रही हैं

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प्रकाशित: 27 Jun 2026, 04:47 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 03:01 AM
चेन्नई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

तमिलनाडु की राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी एमडीएमके ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके के साथ अपना 9 साल पुराना गठबंधन आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया है। यह बड़ा फैसला पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक में लिया गया है। हालांकि एमडीएमके ने अभी औपचारिक रूप से सत्ताधारी टीवीके के नेतृत्व वाले मोर्चे में शामिल होने का एलान नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके साफ संकेत मिलने लगे हैं।

मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार का स्वागत

अपनी बैठक में पास किए गए प्रस्तावों में एमडीएमके ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार का स्वागत किया है। इसके साथ ही पार्टी ने नई सरकार से अपने प्रमुख चुनावी वादों पर टिके रहने का आग्रह किया है। इसमें जनता को भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना और मेकेदातू बांध परियोजना जैसे गंभीर मुद्दों पर तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करना शामिल है। हालांकि पार्टी के प्रस्तावों में टीवीके गठबंधन में शामिल होने का कोई सीधा जिक्र नहीं है, लेकिन तमाम राजनीतिक इशारे इसी तरफ हैं।

डीएमके पर लगाए पार्टी को कमजोर करने के आरोप

गठबंधन से बाहर निकलने के फैसले को सही ठहराते हुए एमडीएमके ने आरोप लगाया कि डीएमके के भीतर उनकी पार्टी को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही थीं। पार्टी ने यह दावा भी किया कि विरोधी दल एआईएडीएमके को सरकार बनाने में मदद करने के लिए एक गुप्त योजना पर काम चल रहा था। इसी वजह से एमडीएमके के लिए इस गठबंधन में बने रहना नामुमकिन हो गया था। दूसरी तरफ डीएमके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके के नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी ने ही एमडीएमके को विधानसभा और संसद में जगह दिलाने में मदद की थी। 

एमडीएमके के दो विधायकों ने बगावत की

यह घटनाक्रम जहां एक तरफ डीएमके के लिए एक झटका है, वहीं खुद एमडीएमके को भी इससे नुकसान उठाना पड़ा है। विधानसभा चुनाव में डीएमके के चुनाव चिह्न पर जीते एमडीएमके के दो विधायकों ने इस बैठक का बहिष्कार कर दिया। इन विधायकों ने संकेत दिया है कि वे डीएमके के साथ ही बने रहेंगे। उनके इस फैसले का मतलब यह है कि अगर एमडीएमके औपचारिक रूप से टीवीके के साथ गठबंधन कर भी लेती है, तो भी सत्ताधारी दल की विधायकों की संख्या में तुरंत कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। 

विजय सरकार के साथ बढ़ती नजदीकियां

एमडीएमके के इस अलगाव के संकेत पहले ही मिल चुके थे, जब पार्टी ने टीवीके सरकार के विश्वास मत के दौरान मतदान से दूरी बना ली थी। इसके बाद एमडीएमके प्रमुख वाइको और उनके बेटे दुरई वाइको ने मुख्यमंत्री विजय और टीवीके के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई बैठकें भी की थीं। एमडीएमके के बाहर निकलने के बाद अब कांग्रेस और वीसीके जैसी पार्टियां सत्ताधारी टीवीके के साथ खड़ी नजर आ रही हैं, जबकि वामपंथी पार्टियां बाहर से सरकार को अपना समर्थन दे रही हैं।

डीएमके के भीतर अकेले चुनाव लड़ने की मांग

यह सियासी बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब डीएमके के भीतर भी भविष्य के चुनाव अकेले दम पर लड़ने की आवाजें तेज हो रही हैं। राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो वाइको को कभी पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का बेहद करीबी माना जाता था। हालांकि बाद में मतभेदों के कारण उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। डीएमके के साथ उनका यह रिश्ता सालों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है और अब एक बार फिर वाइको ने अपनी पार्टी की कश्ती को डीएमके के किनारे से अलग कर लिया है।

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