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महिला बंदी की जेल में मौत
महिला बंदी की जेल में मौत
जगदलपुर (बस्तर)

जेल में सनसनी : हत्या के आरोप में बंद महिला बंदी की संदिग्ध मौत, सुरक्षा तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

बस्तर संभाग मुख्यालय स्थित जगदलपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद 35 वर्षीय महिला बंदी रैमती बघेल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उसने खाली बैरक की खिड़की की ग्रिल से चुनरी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 03 Jun 2026, 06:06 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 08:40 PM
जगदलपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

बस्तर संभाग मुख्यालय स्थित केंद्रीय जेल (सेंट्रल जेल) से एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ न्यायिक हिरासत में बंद एक 35 वर्षीय महिला बंदी रैमती बघेल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, महिला ने जेल परिसर के भीतर एक खाली बैरक की खिड़की की ग्रिल से अपनी चुनरी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली।

इस घटना ने बस्तर की इस हाई-सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा व्यवस्था, प्रहरियों की मुस्तैदी और कैदियों की निगरानी प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है।

चाचा ससुर की हत्या के आरोप में बंद थी मृतका

जानकारी के मुताबिक, बस्तर जिले के दरभा क्षेत्र की रहने वाली रैमती बघेल पर अपने चाचा ससुर की हत्या का संगीन आरोप था। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद, न्यायालय के आदेश पर उसे बीती 3 अप्रैल को न्यायिक हिरासत में जगदलपुर केंद्रीय जेल भेजा गया था। तब से वह इसी जेल में बंद थी।

31 मई की सुबह मचा हड़कंप

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 31 मई की सुबह करीब 7:30 बजे जेल के भीतर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब महिला वार्ड के पास स्थित एक खाली बैरक की खिड़की पर रैमती का शव लटका हुआ देखा गया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ जेल अधिकारियों को दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल स्थानीय कोतवाली पुलिस को सूचित किया गया और शव को फंदे से नीचे उतारा गया।

परिजनों की बेरुखी और 3 मासूम बच्चों की चिंता ने ढाया मानसिक कहर

इस आत्मघाती कदम के पीछे की जो वजहें छनकर सामने आ रही हैं, वे बेहद भावुक करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि रैमती बघेल के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनकी चिंता उसे दिन-रात सताती थी।

तनाव की मुख्य वजह: जेल में बंद होने के बाद से उसका पति या परिवार का कोई भी अन्य सदस्य उससे मुलाकात करने (जेल मुलाकाती) नहीं आ रहा था। अपनों की इस बेरुखी और बच्चों से लंबे अलगाव के कारण वह गहरे डिप्रेशन (मानसिक तनाव) में चली गई थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी मानसिक एकाकीपन और भारी दबाव के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।

हाई-सिक्योरिटी जेल प्रशासन के दावों पर 'कटघरे' में सवाल

इस घटना ने जेल प्रशासन को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। जगदलपुर केंद्रीय जेल को बस्तर संभाग की सबसे सुरक्षित और कड़ी निगरानी वाली जेल माना जाता है। ऐसे में कई गंभीर सवाल हवा में तैर रहे हैं:

  1. निगरानी में चूक: जब महिला बंदी वार्ड से निकलकर खाली बैरक की तरफ गई, तब वहां तैनात वार्डन या प्रहरियों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?

  2. समय पर रेस्क्यू क्यों नहीं: सुबह के वक्त जब बैरकों की गिनती और चेकिंग होती है, तो इस घटना को भांपने में देरी कैसे हुई?

  3. मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी: यदि महिला पिछले कई दिनों से अवसाद (डिप्रेशन) में थी, तो जेल के डॉक्टरों या प्रबंधन द्वारा उसकी काउंसिलिंग क्यों नहीं की गई?

पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा

घटना के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए मृतका के परिजनों को सौंप दिया गया है।

वर्तमान में कोतवाली पुलिस और जेल प्रशासन दोनों ही अपने-अपने स्तर पर मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों के बयानों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट और न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मौत के सही कारणों और सुरक्षा में हुई चूक की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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