छतरपुर में चल रहे केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में हुए आंदोलन और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर आंदोलनकारियों की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और अमित भटनागर की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों की बात सुननी चाहिए थी, लेकिन उसने संवाद के बजाय पुलिस बल का सहारा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है।
‘लोकतंत्र में सवाल उठाना अपराध नहीं
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपनी समस्याएं और सवाल रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन लोगों से डर रही है, जो बिना डरे अपने अधिकारों और मांगों के लिए आवाज उठा रहे हैं।आंदोलनों से जोड़कर सरकार पर साधा निशाना
उमंग सिंघार ने इस कार्रवाई को देश में हो रही अन्य घटनाओं से जोड़ते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलनों को बलपूर्वक रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने केन-बेतवा परियोजना से जुड़े भ्रष्टाचार, कानून उल्लंघन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा।
छतरपुर पहुंचकर प्रभावितों से मिले थे उमंग सिंघार
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि वे 14 जुलाई को खुद छतरपुर पहुंचे थे, जहां उन्होंने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों की समस्याओं को समझने के बाद उन्होंने उनकी लोकतांत्रिक लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिलाया था।सरकार ने बातचीत के बजाय पुलिस कार्रवाई चुनी
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित लोगों के साथ संवाद स्थापित करने के बजाय सरकार ने दमन का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए, न कि गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई से। कांग्रेस नेता ने सरकार से अमित भटनागर सहित सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को लेकर उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों की चिंताओं और आरोपों का समाधान किया जा सके।