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QUAD  अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया होंगे शामिल
QUAD अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया होंगे शामिल
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 चतुष्पक्षीय : जयशंकर की अध्यक्षता में होगी QUAD बैठक, अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया होंगे शामिल

QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक 26 मई को नई दिल्ली में आयोजित होगी, जिसमें भारत , अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष राजनयिक हिस्सा लेंगे। बैठक की अध्यक्षता डॉ. एस. जयशंकर करेंगे। इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री सहयोग, चीन की बढ़ती गतिविधियां, साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन और उभरती तकनीकों पर इस बैठक में व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन और QUAD सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।

कीर्तिमान नेटवर्क
22 May 2026, 12:46 PM
📍 नई दिल्ली
QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक 26 मई को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के शीर्ष राजनयिक इसमें हिस्सा लेंगे। बैठक की अध्यक्षता डॉ. एस. जयशंकर  करेंगे। इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री सहयोग, चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां, सप्लाई चेन सुरक्षा और उभरती वैश्विक तकनीकों पर इस बैठक में व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच QUAD देशों की अगली उच्चस्तरीय बैठक को वैश्विक रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक मेंभारत,संयुक्त राज्य अमेरिका ,जापानऔर ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे। जापान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भारत यात्रा पर आएंगे और QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। बैठक की मेजबानी भारत करेगा और इसकी अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर करेंगे।  यह बैठक केवल एक नियमित कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती रणनीतिक चुनौतियों पर QUAD देशों की सामूहिक प्रतिक्रिया का संकेत भी हो सकती है।

 QUAD की बैठक

पिछले कुछ वर्षों में QUAD समूह की भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दी है। शुरुआत में इसे केवल एक सामरिक संवाद मंच माना जाता था, लेकिन अब यह रक्षा, समुद्री सुरक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। नई दिल्ली में होने वाली बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां, दक्षिण चीन सागर में तनाव, ताइवान जलडमरूमध्य की स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है।  QUAD देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र स्वतंत्र, खुला और नियम आधारित बना रहे। यही कारण है कि इस बैठक को एशिया की रणनीतिक राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

 जापान के विदेश मंत्री तीन दिन के भारत दौरे पर

जापान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक तोशिमित्सु मोतेगी सोमवार से तीन दिनों की भारत यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे QUAD बैठक के अलावा भारत के शीर्ष अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय चर्चाएं भी कर सकते हैं। जापान पहले से ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त समुद्री मार्ग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में जापानी विदेश मंत्री की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जापान और भारत के बीच सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा सहयोग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हो सकती है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा पर भी नजर

अमेरिकी विदेश विभाग पहले ही पुष्टि कर चुका है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी इस बैठक में शामिल होंगे। विदेश विभाग के अनुसार रुबियो स्वीडन में NATO विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद 23 मई से चार दिनों के भारत दौरे पर रहेंगे।  उनकी यह यात्रा QUAD बैठक से कहीं ज्यादा व्यापक महत्व रखती है। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा को लेकर सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि भारत-अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी और नई तकनीकी परियोजनाओं पर भी चर्चा हो सकती है।

क्या है QUAD और क्यों बढ़ रहा इसका महत्व

QUAD यानी चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद चार लोकतांत्रिक देशों का रणनीतिक समूह है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इस समूह का मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना माना जाता है। हालांकि QUAD को आधिकारिक सैन्य गठबंधन नहीं कहा जाता, लेकिन चीन लंबे समय से इसे अपनी क्षेत्रीय रणनीति के खिलाफ उभरते मंच के रूप में देखता रहा है। QUAD अब केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तकनीक, आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन का भी बड़ा मंच बनता जा रहा है।

इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर रहेगा मुख्य फोकस

नई दिल्ली में होने वाली बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा मानी जा रही है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति और हिंद महासागर में बढ़ती गतिविधियों को लेकर QUAD देशों के बीच चिंता बनी हुई है।बैठक में समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक सहयोग और सामरिक समन्वय को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। इसके अलावा महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की स्थिरता और समुद्री निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिए जाने की संभावना है।

साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों पर भी होगी चर्चा

सूत्रों के अनुसार बैठक में साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। दुनिया भर में डिजिटल युद्ध और साइबर हमलों का खतरा बढ़ने के बीच QUAD देश तकनीकी सहयोग को नई प्राथमिकता दे रहे हैं।  आने वाले वर्षों में तकनीकी श्रेष्ठता ही वैश्विक शक्ति संतुलन तय करेगी। ऐसे में QUAD देश मिलकर सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी नेटवर्क विकसित करना चाहते हैं।

चीन की गतिविधियों पर भी रह सकती है नजर

हालांकि QUAD आधिकारिक रूप से किसी देश के खिलाफ गठबंधन नहीं है, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की बढ़ती गतिविधियां इस बैठक के प्रमुख संदर्भों में शामिल रहेंगी। दक्षिण चीन सागर में सैन्य विस्तार, ताइवान के आसपास बढ़ती गतिविधियां और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की चीन की कोशिशों को QUAD देश गंभीरता से देख रहे हैं।  नई दिल्ली बैठक QUAD देशों की सामूहिक रणनीति को और स्पष्ट कर सकती है।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

भारत की मेजबानी में होने वाली यह बैठक वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती रणनीतिक और कूटनीतिक भूमिका को भी दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाने वाले प्रमुख देशों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं का अहम केंद्र बनता जा रहा है। भारत QUAD के भीतर ऐसी भूमिका निभाना चाहता है जहां सुरक्षा सहयोग के साथ आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को भी बराबर महत्व दिया जाए।

QUAD के भविष्य के लिए अहम संकेत

हाल के महीनों में QUAD की सक्रियता और भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। कुछ विश्लेषकों ने अमेरिकी प्राथमिकताओं और बदलते वैश्विक समीकरणों के कारण इस मंच की दिशा पर सवाल उठाए थे। लेकिन अब नई दिल्ली में होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक यह संकेत देती है कि सदस्य देश QUAD को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  यह बैठक आने वाले वर्षों में QUAD की रणनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच यह मंच भविष्य में और अधिक प्रभावशाली बन सकता है।
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