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पद्मा बैराज परियोजना पर बढ़ी चिंता, पर्यावरण खतरे में
पद्मा बैराज परियोजना पर बढ़ी चिंता, पर्यावरण खतरे में
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बैराज : पद्मा नदी पर बैराज बनाने की तैयारी से बढ़ी चिंता, बांग्लादेश में पर्यावरण और जल संकट की आशंका

बांग्लादेश में प्रस्तावित पद्मा बैराज परियोजना को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा की धारा पर बनने वाला यह बैराज पर्यावरण, कृषि, जल संतुलन और लाखों लोगों की आजीविका पर गंभीर असर डाल सकता है।

प्रकाशित: 22 May 2026, 02:52 PM · अपडेट: 16 Sep 2026, 10:32 AM
बांग्लादेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख तारिक रहमान द्वारा पद्मा नदी पर बैराज परियोजना बनाने के ऐलान के बाद दक्षिण एशिया में एक नई बहस शुरू हो गई है। बांग्लादेश सरकार इस परियोजना को देश के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बता रही है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ और जल वैज्ञानिक इसे बेहद संवेदनशील और संभावित रूप से खतरनाक परियोजना मान रहे हैं।  यह परियोजना भविष्य में बांग्लादेश के लिए पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक संकट का कारण बन सकती है। खास बात यह है कि जिस पद्मा नदी पर बैराज बनाने की योजना बनाई जा रही है, वही नदी भारत में गंगा के नाम से जानी जाती है। भारत से निकलकर जब यह नदी बांग्लादेश में प्रवेश करती है, तब इसे पद्मा कहा जाता है।

पद्मा नदी भारत से बांग्लादेश तक पहुंचती है 

गंगा नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण और विशाल नदियों में से एक है। पश्चिम बंगाल सीमा पार करने के बाद यही नदी बांग्लादेश में पद्मा नाम से बहती है। यह नदी बांग्लादेश की कृषि, मत्स्य पालन, जल परिवहन और लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत मानी जाती है। बांग्लादेश सरकार का दावा है कि प्रस्तावित बैराज परियोजना से जल प्रबंधन बेहतर होगा, सिंचाई सुविधाएं बढ़ेंगी और देश के कई हिस्सों में बाढ़ तथा सूखे की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। परियोजना अभी शुरुआती प्रस्तावित चरण में ही है, लेकिन इसके ऐलान के साथ ही पर्यावरण विशेषज्ञों और जल वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंताएं जतानी शुरू कर दी हैं।

पर्यावरण के लिए खतरा

पेंसिल्वेनिया की कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी में जियोलॉजी और ओशनोग्राफी के प्रोफेसर मोहम्मद खालेकुज्जमान ने इस परियोजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे “गंगा बैराज” कहा जाना अधिक उचित होगा, क्योंकि यह मूल रूप से गंगा नदी का ही हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बड़े स्तर पर हस्तक्षेप करने से बांग्लादेश के नदी तंत्र, मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता और डेल्टा क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पद्मा नदी केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का आधार है। यदि बैराज के कारण नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ तो इससे निचले क्षेत्रों में जल संकट, नदी कटाव और तलछट जमाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे मत्स्य पालन और खेती पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

बाढ़ और सूखे का खतरा

बड़े बैराज और बांध परियोजनाएं कई बार बाढ़ नियंत्रण के बजाय नई समस्याएं पैदा कर देती हैं। यदि जल प्रबंधन संतुलित नहीं रहा तो मानसून के दौरान अत्यधिक जलभराव और दूसरी तरफ गर्मियों में पानी की कमी जैसी स्थितियां बन सकती हैं। बांग्लादेश पहले से ही जलवायु परिवर्तन, समुद्री जल स्तर में वृद्धि और चक्रवात जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नदी के प्राकृतिक बहाव में परिवर्तन से हालात और जटिल हो सकते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि पद्मा नदी बांग्लादेश के डेल्टा क्षेत्र को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नदी से आने वाली तलछट कृषि भूमि को उपजाऊ बनाती है। यदि बैराज के कारण तलछट का प्रवाह बाधित हुआ तो कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

भारत-बांग्लादेश जल संबंध

चूंकि पद्मा नदी भारत से होकर बांग्लादेश पहुंचती है, इसलिए इस परियोजना का असर दोनों देशों के जल संबंधों पर भी पड़ सकता है। दक्षिण एशिया में पहले से ही कई नदियों के जल बंटवारे को लेकर विवाद और संवेदनशीलता बनी हुई है। ऐसी किसी भी बड़ी परियोजना से पहले भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापक तकनीकी और पर्यावरणीय अध्ययन आवश्यक है। यदि नदी के प्रवाह और जल वितरण को लेकर असंतुलन पैदा हुआ तो भविष्य में यह क्षेत्रीय विवाद का विषय भी बन सकता है।

स्थानीय लोगों को परेशानी 

बांग्लादेश के कई नदी किनारे रहने वाले समुदायों ने भी परियोजना को लेकर चिंता व्यक्त की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी उनके जीवन, रोजगार और संस्कृति का हिस्सा है। यदि नदी का स्वरूप बदला तो लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। हालांकि सरकार अभी परियोजना को विकास और जल प्रबंधन से जोड़कर देख रही है, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यापक पर्यावरणीय मूल्यांकन और वैज्ञानिक अध्ययन बेहद जरूरी है। फिलहाल पद्मा बैराज परियोजना केवल प्रस्तावित चरण में है, लेकिन इसके ऐलान ने दक्षिण एशिया में नदी प्रबंधन, पर्यावरण सुरक्षा और जल राजनीति को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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