US Political News: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे को राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों और उनके नेतृत्व के प्रति जनता की नाराजगी के तौर पर भी देखा जा रहा है। महंगाई, ईरान के साथ सैन्य संघर्ष और ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया। आइए जानते हैं रिपब्लिकन पार्टी की हार के पांच प्रमुख कारण।
महंगाई ने बिगाड़ा रिपब्लिकन पार्टी का चुनावी गणित
अमेरिका में बढ़ती महंगाई इस चुनाव का सबसे अहम मुद्दा बनकर उभरी। पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम परिवार परेशान थे। मतदाताओं की नाराजगी का असर मतदान के नतीजों में भी दिखाई दिया। उत्तरी कैरोलिना की एक मतदाता ने चुनाव से पहले बीबीसी से बातचीत में बताया था कि पेट्रोल और किराने के सामान की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के बजाय डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को वोट दिया। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत बढ़ी। सितंबर में अमेरिका में डीजल की औसत खुदरा कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थी। चुनाव से जुड़े एक सर्वे में करीब 79 प्रतिशत मतदाताओं ने माना कि महंगाई के कारण पिछले एक साल में उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ईरान के साथ युद्ध का फैसला पड़ा भारी
राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश नीति भी रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ गई। अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी में ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई को लेकर देश के भीतर असंतोष देखने को मिला। इस संघर्ष के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। यह समुद्री मार्ग दुनिया में कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ और ईंधन की कीमतों में तेजी आई। इसका सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ा। ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में अमेरिका फर्स्ट की नीति को प्रमुखता दी थी।
राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश नीति भी रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ गई। अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी में ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई को लेकर देश के भीतर असंतोष देखने को मिला। इस संघर्ष के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। यह समुद्री मार्ग दुनिया में कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ और ईंधन की कीमतों में तेजी आई। इसका सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ा। ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में अमेरिका फर्स्ट की नीति को प्रमुखता दी थी।
डेमोक्रेट्स की रणनीति और मजबूत उम्मीदवारों ने बदली तस्वीर
रिपब्लिकन पार्टी की हार में डेमोक्रेट्स की चुनावी रणनीति की भी बड़ी भूमिका रही। पार्टी ने इस बार केवल राष्ट्रीय राजनीति और बड़े नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय मुद्दों को प्रचार का केंद्र बनाया। महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया, जिनकी स्थानीय स्तर पर अच्छी पहचान और विश्वसनीयता थी। टेक्सास और कंसास में जेम्स तालारिको तथा पादरी एडम हैमिल्टन जैसे उम्मीदवारों ने जनता से सीधे जुड़े मुद्दों पर प्रचार किया। दक्षिण कैरोलिना में पूर्व बाल रोग विशेषज्ञ एनी एंड्रयूज की जीत भी चर्चा में रही।
ट्रंप की गिरती लोकप्रियता बनी पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी
इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घटती लोकप्रियता से हुआ। महंगाई और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर जनता की नाराजगी सीधे उनके नेतृत्व से जुड़ी हुई थी। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में जिन राज्यों में ट्रंप को समर्थन मिला था, वहां भी इस बार रिपब्लिकन उम्मीदवारों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे इस चुनाव को ऐसे देखें, जैसे खुद ट्रंप उम्मीदवार हों। इसके जरिए उन्होंने पार्टी के पक्ष में वोट जुटाने की कोशिश की। लेकिन चुनावी नतीजों ने दिखाया कि उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता पहले जैसी नहीं रह गई है।हिस्पैनिक और अश्वेत मतदाताओं का बदला रुख
रिपब्लिकन पार्टी की हार का एक और बड़ा कारण हिस्पैनिक और अश्वेत मतदाताओं के समर्थन में आई कमी रही। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में इन समुदायों के एक हिस्से ने ट्रंप का समर्थन किया था, जिससे उनकी जीत को मजबूती मिली थी। लेकिन मिडटर्म चुनाव में यह रुझान बदलता नजर आया। टेक्सास-मेक्सिको सीमा से सटे हिस्पैनिक बहुल जिलों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने प्रतिनिधि सभा की तीनों सीटों पर जीत दर्ज की। न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण के मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में हिस्पैनिक बहुल काउंटियों में रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों के खिलाफ 22 प्रतिशत से अधिक का अंतर देखने को मिला।







