Stock Market: अमेरिकी राजनीति में आए बड़े बदलाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद घरेलू शेयर बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई। गुरुवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी ने लंबी छलांग लगाई। सेंसेक्स में 1,680 अंकों से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली, जबकि निफ्टी 24,400 के पार पहुंच गया।
सेंसेक्स 1,680 अंक से ज्यादा चढ़ा, निफ्टी 24,400 के पार
गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मजबूत रही। सुबह 9 बजकर 53 मिनट पर सेंसेक्स 2.18 फीसदी यानी 1,687.79 अंक की बढ़त के साथ 78,989.19 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। सुबह 9 बजकर 57 मिनट पर निफ्टी 1.96 फीसदी यानी 468.95 अंक चढ़कर 24,428.10 के स्तर पर पहुंच गया।
निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपए का इजाफा
शेयर बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ा उछाल आया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 8 लाख करोड़ रुपए बढ़कर लगभग 501 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। सेंसेक्स और निफ्टी में आई मजबूत बढ़त ने बाजार में निवेश करने वालों को बड़ी राहत दी है।ट्रंप की चुनावी हार से बाजार को मिला सकारात्मक संकेत
अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। चुनाव में पार्टी की हार के बाद अमेरिकी कांग्रेस में उसकी स्थिति कमजोर हुई है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी राजनीति में इस बदलाव से पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की उम्मीदें बढ़ी हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए कच्चे तेल की सप्लाई का एक अहम रास्ता है। अब इस मार्ग पर स्थिति सामान्य होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में नरमी आई है।अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से निवेशकों का रुख बदला
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट को भी भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.2 फीसदी और 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 4.8 फीसदी पर आ गई। वहीं, दो साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड भी घटकर 4.5 फीसदी रही।







