Share Market: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला अक्टूबर में भी जारी है। महीने में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से 48,056 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मिडिल ईस्ट में तनाव, महंगाई की आशंका और कंपनियों की कमाई को लेकर चिंताओं ने बाजार पर दबाव बनाया है। हालांकि, 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान बिकवाली की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी और विदेशी निवेशक दो कारोबारी दिनों में शुद्ध खरीदार भी बने।
सितंबर में भी बाजार से निकाला था पैसा
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव सितंबर में भी देखने को मिला था। उस महीने FPI ने भारतीय शेयर बाजार से 35,861 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की थी। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में विदेशी निवेशकों ने 20,200 करोड़ रुपए और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपए का निवेश किया था।
2026 में अब तक ₹3.08 लाख करोड़ की निकासी
आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयरों से करीब 3.08 लाख करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। यह पूरे वर्ष 2025 में दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी से काफी अधिक है। लगातार हो रही इस बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की भूमिका बाजार को सहारा देने में महत्वपूर्ण बनी हुई है।कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव का असर
'चॉइस वेल्थ' के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौर के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक प्रमुख वजह हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल का भाव करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
कंपनियों की कमाई को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
'मीरा मनी' के सह-संस्थापक आनंद के. राठी के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर बनी आशंकाएं विदेशी निवेशकों की बिकवाली के प्रमुख कारण हैं। हालांकि, दूसरी तिमाही के नतीजे काफी मजबूत रहे हैं, लेकिन आने वाली तिमाहियों में तस्वीर बदल सकती है। तेल और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे और कमाई की वृद्धि पर असर पड़ सकता है।घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों और सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला पैसा बाजार को सहारा दे रहा है। आनंद के. राठी ने समाचार एजेंसी PTI से बातचीत में बताया कि घरेलू निवेश का लगातार प्रवाह विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को कम करने में मदद कर रहा है।







