Mahasamund News: वन विभाग ने अवैध रूप से रखी गई सागौन की लकड़ी के खिलाफ कार्रवाई की है, ग्राम कछारडीह में भाजपा नेता और आदिम जाति सेवा सहकारी समिति रायतुम के अध्यक्ष संतुराम यादव के आवास पर छापेमारी कर लकड़ी का बड़ा जखीरा जब्त किया गया। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
जब्त लकड़ी को वन विभाग ने सुरक्षित महासमुंद डिपो पहुंचा दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग को क्षेत्र में इमारती लकड़ी के अवैध भंडारण की सूचना मिल रही थी। इसके बाद झलप उपपरिक्षेत्र, महासमुंद वन परिक्षेत्र और सिरपुर परियोजना मंडल की संयुक्त टीम ने कछारडीह स्थित आवास पर दबिश दी।
बारनवापारा के जंगलों से लकड़ी लाने की आशंका
प्रारंभिक जांच में वन विभाग को आशंका है कि जब्त सागौन की लकड़ी बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्र के जंगलों से अवैध कटाई कर लाई गई हो सकती है। फिलहाल लकड़ी के स्रोत और उसे कछारडीह तक पहुंचाने में शामिल लोगों के संबंध में जांच की जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति साफ हो सकेगी।
सागौन की लकड़ी जब्त, लाखों की कीमत का अनुमान
तलाशी के दौरान परिसर से सागौन के चिरान, चौखट-पल्ले और बड़े लट्ठे मिले। वन विभाग की टीम ने लकड़ी जब्त कर नियमानुसार पंचनामा तैयार किया। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, जब्त लकड़ी की कीमत लाखों रुपए हो सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक मात्रा और बाजार मूल्य की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।वैध दस्तावेजों की जांच कर रहा वन विभाग
कार्रवाई के बाद वन विभाग संबंधित पक्ष से लकड़ी के वैध दस्तावेज और खरीद-बिक्री से जुड़े बिल मांग रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यदि लकड़ी के भंडारण को लेकर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वन अपराध से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल मामले में जांच जारी है। लकड़ी कहां से लाई गई थी और उसके भंडारण के पीछे क्या वजह थी, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे।







