Narayanpur News: अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जमीनी हकीकत पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत झारावाही के ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद नहीं मिलने के बाद खुद श्रमदान कर टूटे रास्ते को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया। ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से नाले पर ह्यूम पाइप डालकर आवागमन बहाल करने की कोशिश की।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत झारावाही से हतलानार होते हुए नारायणपुर जिला मुख्यालय को जोड़ने वाला मार्ग भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। इस दौरान सड़क पर बनी पुलिया बह गई, जिससे झारावाही, हतलानार और दुम्मा गांव का संपर्क प्रभावित हो गया। सड़क बंद होने से ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को हुई। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन गया था।
शिकायतों के बाद भी नहीं मिली मदद, ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया क्षतिग्रस्त होने की जानकारी जनपद पंचायत और जिला प्रशासन के अधिकारियों को दी गई थी। इसके बावजूद लंबे समय तक मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
लगातार इंतजार के बाद जब प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिली तो ग्रामीणों ने आपस में मिलकर रास्ता बनाने का फैसला किया। उन्होंने श्रमदान करते हुए खुद ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया।
रस्सी और लकड़ी के सहारे उठाया भारी ह्यूम पाइप
ग्रामीणों ने बिना किसी बड़ी मशीन या सरकारी मदद के लकड़ी और रस्सियों की सहायता से कई क्विंटल वजनी ह्यूम पाइप को उठाया और बह चुके नाले में स्थापित किया। इसके बाद ग्रामीणों के लिए आने-जाने का अस्थायी रास्ता तैयार हो सका। ग्रामीणों की यह पहल जहां उनके हौसले और एकजुटता को दिखाती है, वहीं यह सवाल भी खड़ा करती है कि बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें खुद आगे क्यों आना पड़ा।प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों की इस पहल के बाद अब कई सवाल सामने आ रहे हैं—
- बारिश के दौरान सड़क और पुलिया टूटने के बाद संबंधित विभागों ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया?
- सूचना मिलने के बावजूद प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने में देरी क्यों हुई?
- दूरस्थ क्षेत्रों में विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों की जमीनी स्थिति क्या है?
- क्या ग्रामीणों द्वारा बनाए गए अस्थायी रास्ते के बाद प्रशासन स्थायी पुलिया और सड़क निर्माण की पहल करेगा?
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में ग्रामीणों की यह कोशिश उनके संघर्ष और आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। हालांकि, यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि दूरस्थ क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

