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Allegation of negligence in treatment at a private clinic (Image Source: AI Photo)
Allegation of negligence in treatment at a private clinic (Image Source: AI Photo)
गरियाबंद

CG Breaking News: गरियाबंद के निजी क्लीनिक में युवक की मौत पर बवाल, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप, स्वास्थ्य विभाग ने बैठाई जांच

Chhattisgarh Breaking News: गरियाबंद के मैनपुर में 26 वर्षीय युवक डिगने यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने निजी क्लीनिक पर गलत इलाज का आरोप लगाया है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 09 Sep 2026, 02:51 PM · अपडेट: 22 Oct 2026, 08:25 PM
गरियाबंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CG Breaking News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित मैनपुर ब्लॉक से एक बेहद दुखद और गंभीर मामला सामने आया है। सराईपानी गांव के रहने वाले 26 वर्षीय युवक डिगने यादव की जन्माष्टमी के दिन इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने अमलीपदर के एक निजी क्लीनिक और वहां के डॉक्टर पर गलत इलाज का सीधा आरोप लगाया है। परिजनों ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमा भी हरकत में आ गया है। मृतक के परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, डिगने यादव को बीते दिनों तेज बुखार की शिकायत थी। उसे इलाज के लिए अमलीपदर स्थित एक निजी क्लीनिक ले जाया गया। 

दवाओं की भारी खुराक देने का आरोप 

आरोप है कि वहां डॉक्टर ने बुखार उतारने के लिए मरीज को भारी खुराक में दवाएं दीं और 'आर्टीसुनेट' इंजेक्शन की कई डोज लगा दीं। परिजन का दावा है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद डिगने की तबीयत सुधरने के बजाय अचानक और ज्यादा बिगड़ने लगी। हालत नाजुक होते देख उसे आनन-फानन में अमलीपदर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उसे देवभोग अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन उसे आगे इलाज के लिए ले जा ही रहे थे कि जन्माष्टमी के पर्व वाले दिन उसने दम तोड़ दिया।

शव को कब्र से निकालकर करवा सकता है पोस्टमार्टम 

युवक की मौत के बाद सदमे में आए परिजनों ने उस समय शव का पोस्टमार्टम (पीएम) नहीं कराया और रीति-रिवाज के मुताबिक शव को दफना दिया। हालांकि, अब परिजनों के आरोप के बाद कानूनी और चिकित्सकीय पेच फंस गया है। अब पूरी जांच इस बात पर टिक गई है कि क्या निजी क्लीनिक में दिए गए इंजेक्शन की डोज जरूरत से ज्यादा थी? सच्चाई तक पहुंचने के लिए मरीज की पर्ची, दी गई दवाएं, सरकारी अस्पताल के रेफरल रिकॉर्ड्स की खंगाल शुरू कर दी गई है। चर्चा यह भी है कि जरूरत पड़ने पर प्रशासन शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम भी करवा सकता है।

परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल: डॉक्टर की डिग्री की भी हो जांच

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • मरीज को किस आधार पर आर्टीसुनेट इंजेक्शन और अन्य दवाएं दी गईं, इसका पूरा ब्यौरा सार्वजनिक हो।

  • इलाज करने वाले डॉक्टर मनीष सिन्हा की मेडिकल डिग्री, रजिस्ट्रेशन और क्लीनिक संचालन की वैधानिकता की बारीकी से जांच की जाए।

वहीं क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि संबंधित डॉक्टर का किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राजनीतिक जुड़ाव होने से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, सच क्या है, यह तो केवल प्रशासनिक और मेडिकल जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।

अधिकारियों और डॉक्टर का पक्ष

  • सीएमएचओ डॉ. यूएस नवरत्ने का बयान:

"मामला हमारे संज्ञान में आया है और लिखित/मौखिक माध्यमों से शिकायतें मिली हैं। पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य, पर्चे या लापरवाही के सबूत सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।"

  • डॉक्टर मनीष सिन्हा का पक्ष:

दूसरी ओर, आरोपी डॉक्टर मनीष सिन्हा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मरीज को नियमानुसार ही इलाज दिया गया था और उसमें किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं हुई है। उन्होंने परिजनों के आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है।

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