दवाओं की भारी खुराक देने का आरोप
यह भी पढ़ेंRewa News: संजय गांधी अस्पताल को लेकर कांग्रेस का बड़ा हमला, विधायक के बयान से मचा हड़कंपशव को कब्र से निकालकर करवा सकता है पोस्टमार्टम
युवक की मौत के बाद सदमे में आए परिजनों ने उस समय शव का पोस्टमार्टम (पीएम) नहीं कराया और रीति-रिवाज के मुताबिक शव को दफना दिया। हालांकि, अब परिजनों के आरोप के बाद कानूनी और चिकित्सकीय पेच फंस गया है। अब पूरी जांच इस बात पर टिक गई है कि क्या निजी क्लीनिक में दिए गए इंजेक्शन की डोज जरूरत से ज्यादा थी? सच्चाई तक पहुंचने के लिए मरीज की पर्ची, दी गई दवाएं, सरकारी अस्पताल के रेफरल रिकॉर्ड्स की खंगाल शुरू कर दी गई है। चर्चा यह भी है कि जरूरत पड़ने पर प्रशासन शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम भी करवा सकता है।परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल: डॉक्टर की डिग्री की भी हो जांच
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि:
मरीज को किस आधार पर आर्टीसुनेट इंजेक्शन और अन्य दवाएं दी गईं, इसका पूरा ब्यौरा सार्वजनिक हो।
इलाज करने वाले डॉक्टर मनीष सिन्हा की मेडिकल डिग्री, रजिस्ट्रेशन और क्लीनिक संचालन की वैधानिकता की बारीकी से जांच की जाए।
वहीं क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि संबंधित डॉक्टर का किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राजनीतिक जुड़ाव होने से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, सच क्या है, यह तो केवल प्रशासनिक और मेडिकल जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
अधिकारियों और डॉक्टर का पक्ष
सीएमएचओ डॉ. यूएस नवरत्ने का बयान:
"मामला हमारे संज्ञान में आया है और लिखित/मौखिक माध्यमों से शिकायतें मिली हैं। पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य, पर्चे या लापरवाही के सबूत सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।"
डॉक्टर मनीष सिन्हा का पक्ष:
दूसरी ओर, आरोपी डॉक्टर मनीष सिन्हा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मरीज को नियमानुसार ही इलाज दिया गया था और उसमें किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं हुई है। उन्होंने परिजनों के आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है।
