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Uber and Rapido licenses suspended (Image Source: AI Photo)
Uber and Rapido licenses suspended (Image Source: AI Photo)
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Uber-Rapido License Suspension: चंडीगढ़ में ऐप कैब सेवाओं पर बड़ा एक्शन, लाइसेंस 6 महीने के लिए निलंबित

Uber-Rapido License Suspension: चंडीगढ़ प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में Uber और Rapido के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए हैं। ड्राइवर इंश्योरेंस और किराया नियमों की अनदेखी को कार्रवाई की मुख्य वजह बताया गया है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 09 Sep 2026, 08:53 AM · अपडेट: 28 Oct 2026, 05:58 AM
चंडीगढ़
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Uber-Rapido License Suspension: शहर में कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। चंडीगढ़ प्रशासन ने मोटर वाहन नियमों की लगातार अनदेखी करने के आरोप में देश की दो दिग्गज ऐप-बेस्ड एग्रीगेटर कंपनियों—'उबर' और 'रैपिडो' के लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिए हैं। राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) की ओर से की गई यह सख्त कार्रवाई 8 सितंबर से प्रभावी हो गई है। 

नियमों के पालन के लिए दिए एक साल से अधिक का समय 

इस फैसले की वजह से 'उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड' और 'रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज' (रैपिडो) के परिचालन पर सीधा असर पड़ेगा। परिवहन विभाग के मुताबिक, यह कार्रवाई 'चंडीगढ़ प्रशासन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर नियम, 2025' के नियम 17 के तहत की गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों कंपनियों को नियमों के पालन के लिए एक साल से अधिक समय दिया गया। इस दौरान उन्हें कई बार नोटिस भेजे गए, औचक निरीक्षण हुए, सुनवाई के अवसर मिले और जरूरी दस्तावेज पेश करने को कहा गया। 

कंपनियों का जवाब संतोषजनक 

हालांकि, कंपनियों की ओर से कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया गया। प्रमुख उल्लंघनों में ड्राइवरों—खासकर बाइक-टैक्सी कैप्टन्स—को पर्याप्त स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस कवर न देना और प्रशासन द्वारा निर्धारित किराए की दरों को लागू न करना शामिल है। एसटीए का कहना है कि कंपनियों के जवाब संतोषजनक नहीं थे, जिसके बाद यह कठोर फैसला लेना पड़ा। यह पहला मौका नहीं है जब प्रशासन ने किसी कैब एग्रीगेटर पर चाबुक चलाया हो। इसी साल जून में 'ओला' (एएनआई टेक्नोलॉजीज) का लाइसेंस भी इन्हीं नियमों के उल्लंघन के आरोप में छह महीने के लिए निलंबित किया जा चुका है। 

ओला का लाइसेंस भी किया था सस्पेंड

ओला के मामले में ड्राइवर्स और यात्रियों की ओर से हेल्थ इंश्योरेंस, ड्राइवर ट्रेनिंग, किराया ढांचा और कंपनी के सब्सक्रिप्शन मॉडल को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। जुलाई 2025 में ओला को नोटिस जारी किया गया था और सितंबर 2025 में चंडीगढ़ के ट्रांसपोर्ट सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि कंपनी ने बिना अधिकारियों को सूचित किए अपना स्थानीय दफ्तर ही खाली कर दिया था। बार-बार चेतावनी के बाद भी सुधार न होने पर कमेटी की सिफारिश पर ओला का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया था। 

ड्राइवरों की आजीविका के लिए निकाला जाएगा समाधान 

शहर में एक साथ उबर, रैपिडो और ओला जैसी प्रमुख कंपनियों पर शिकंजा कसने से आम जनता की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। दूसरे शहरों से चंडीगढ़ आने-जाने वाले यात्रियों को कैब मिलने में खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि 'भारत टैक्सी' की सेवाएं फिलहाल शहर में सुचारू रूप से जारी हैं। दूसरी तरफ, कैब चालकों और उनसे जुड़े संगठनों ने मांग की है कि ऐप आधारित सेवाओं, किराए के ढांचे और ड्राइवरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जाए। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वे एग्रीगेटर कंपनियों के कामकाज की पूरी समीक्षा करें ताकि चालकों के हितों की रक्षा हो सके।
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