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Movement of ships in the Strait of Hormuz (Image Source: social media)
Movement of ships in the Strait of Hormuz (Image Source: social media)
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Iran Hormuz Strait: ईरान का बड़ा दांव, भारत और चीन को मिली छूट, पाकिस्तान में क्यों मचा है हड़कंप?

Iran Hormuz Strait: जलडमरूमध्य से भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को प्रतिबंधों में छूट देने की घोषणा की है। पाकिस्तान का नाम सूची में नहीं होने से वहां सवाल उठ रहे हैं। जानिए भारत को मिली इस राहत के पीछे क्या वजह है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Nov 2026, 12:03 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
इस्लामाबाद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Iran Hormuz Strait: दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्गों में शुमार होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। तेहरान ने इस रूट से गुजरने को लेकर कुछ चुनिंदा देशों को पाबंदियों से बड़ी राहत दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मुकद्दम ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही की पूरी इजाजत होगी। ईरान के इस फैसले से जहां एक तरफ इन चारों देशों के लिए ऊर्जा और व्यापारिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पाकिस्तानी हलकों में इसे लेकर खासी नाराजगी और हैरानी जताई जा रही है।

पाकिस्तान में क्यों सुलग रहा है गुस्सा? 

ईरान के इस कदम के बाद पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर्स और कूटनीतिक जानकारों के बीच बहस छिड़ गई है। पाकिस्तान का एक बड़ा वर्ग इसे अपने देश के साथ एक तरह की अनदेखी और कूटनीतिक झटके के तौर पर देख रहा है। पाकिस्तान के विदेश नीति विशेषज्ञ और आईएसएसआई (ISSI) के निदेशक डॉ. खुर्रम अब्बास ने ईरान के इस फैसले पर खुला सवाल उठाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा कि ईरान ने चीन, भारत, इराक और कतर को तो होर्मुज से बिना रोकटोक के गुजरने की छूट दे दी है, लेकिन इसमें पाकिस्तान का नाम दूर-दूर तक नहीं है। 
डॉ. खुर्रम ने सवाल किया, "भारत को यह छूट दवाओं के आयात के लिए और चीन को राजनीतिक समर्थन हासिल करने के एवज में दी गई है। लेकिन पाकिस्तान, जो ईरान के साथ लंबी सीमा साझा करता है और जिसने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम कराने के लिए भी तमाम कूटनीतिक कोशिशें की हैं, उसे इस सूची से बाहर क्यों रखा गया?" पाकिस्तानी जानकारों का यह भी तर्क है कि मध्य-पूर्व के मामलों में मध्यस्थता की पेशकश करने के बावजूद इस्लामाबाद को ऐसा 'नजरअंदाज' किया जाना समझ से परे है।

ईरान ने क्यों और किसे दी है छूट?

इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए ईरानी सांसद अमीर हयात मुकद्दम ने स्पष्ट किया है कि ये रियायतें आंख मूंदकर नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीतिक और व्यापारिक प्राथमिकताओं के तहत दी गई हैं।

  • भारत: भारत को यह छूट इसलिए दी गई है ताकि ईरान से भारत के बीच दवाइयों (मेडिकल सप्लाई) के आयात और व्यापार में कोई बाधा न आए।

  • चीन: चीन को दी गई रियायत का मुख्य उद्देश्य बीजिंग से कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन को मजबूत करना है।

  • कतर और इराक: कतर के जहाजों पर ईरान पहले से ही किसी तरह का ट्रांजिट टोल नहीं लगाता है, जबकि भारत और इराक जैसे देशों के साथ तय समझौतों और विशेष शर्तों के आधार पर नियमों में ढील दी गई है।

ईरानी अधिकारी का साफ कहना था कि यह सब आपसी व्यापार और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित है, और हर छूट के पीछे एक ठोस कूटनीतिक वजह मौजूद है।

क्यों इतना अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? 

फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त नौवहन मार्गों (शिपिंग रूट्स) में से एक है। वैश्विक स्तर पर होने वाली ऊर्जा सप्लाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से भारत समेत दुनिया के तमाम देशों तक पहुंचते हैं। उल्लेखनीय है कि इस साल फरवरी के आखिरी सप्ताह में अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और हमलों के जवाब में ईरान ने इस महत्वपूर्ण रूट को बंद करने का कड़ा फैसला लिया था। 

इसके बाद से ईरान ने सुरक्षा कारणों से चुनिंदा और विशेष अनुमति प्राप्त जहाजों को ही यहां से गुजरने की इजाजत दी है। इस रूट के बाधित होने से पहले ही वैश्विक बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर असर पड़ा है, ऐसे में ईरान का यह नया फैसला अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

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