US Midterm Elections: अमेरिका से आ रही राजनीतिक हलचल ने एक बार फिर से दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में संपन्न हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के रुझान अब लगभग पूरी तरह साफ हो चुके हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स और आंकड़ों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) में बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि सीनेट में भी उसकी स्थिति मजबूत होती दिख रही है। इस उलटफेर का सीधा मतलब यह है कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों का नियंत्रण अब रिपब्लिकन पार्टी के हाथों से निकलकर डेमोक्रेट्स के पाالا में जा सकता है।
इन नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नाराजगी तो जाहिर की है, साथ ही यह भी कहा है कि वे इस हार को स्वीकार करते हुए देश हित में डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। हालांकि, जमीन पर हालात ट्रंप के लिए इतने आसान नहीं रहने वाले हैं। फिलहाल संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत है, लेकिन समीकरण बदलते ही ट्रंप की मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं। आइए जानते हैं उन 5 बड़ी चुनौतियों के बारे में, जिनका सामना अब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के बचे हुए हिस्से में करना पड़ सकता है:
तीसरी बार महाभियोग (इम्पीचमेंट) का बड़ा खतरा
इन चुनावी नतीजों के बाद डोनाल्ड ट्रंप के खेमे में जो सबसे बड़ा डर सता रहा है, वह है महाभियोग का। राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप पहले ही दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं। अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स के पास बहुमत आने से यह आशंका फिर से गहरा गई है कि उनके खिलाफ तीसरी बार महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह ट्रंप के राजनीतिक करियर के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित होगा।
फैसलों और पारिवारिक कारोबार की संसदीय जांच
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिलते ही डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथ में सदन की सभी महत्वपूर्ण समितियों (Committees) का नियंत्रण आ जाएगा। इसके बाद वे डोनाल्ड ट्रंप, उनके प्रशासन के तमाम अधिकारियों और यहां तक कि उनके परिवार के व्यावसायिक लेन-देन की गहराई से जांच शुरू कर सकते हैं। विपक्षी दल लंबे समय से ट्रंप परिवार पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते रहे हैं, और अब सदन में बहुमत होने से उनके लिए इन जांचों को आगे बढ़ाना बेहद आसान हो जाएगा।
लेजिस्लेटिव (विधायी) एजेंडे पर लग सकती है ब्रेक
डोनाल्ड ट्रंप अपने महत्वाकांक्षी विधायी एजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन संसद के निचले सदन पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने का मतलब है कि अब यह तय करने की ताकत उनके पास आ जाएगी कि किन विधेयकों पर वोटिंग होगी और किन पर नहीं। डेमोक्रेट्स आसानी से रिपब्लिकन समर्थित प्रस्तावों और विधेयकों को रोक सकेंगे। ऐसे में ट्रंप के लिए अपने मनमुताबिक नीतियों और कानूनों को लागू करवाना टेढ़ी खीर साबित होने वाला है।अहम पदों पर नियुक्तियों में रोड़े
किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अपने पसंदीदा संघीय न्यायाधीशों (Federal Judges), सुप्रीम कोर्ट के जजों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति करना बेहद अहम होता है। इन सभी नियुक्तियों के लिए सीनेट की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। चूंकि अब सीनेट में भी समीकरण बदल रहे हैं, डेमोक्रेट्स जब चाहें तब इन नामांकनों पर अंगा लगा सकते हैं, जिससे ट्रंप के लिए अपनी पसंद के लोगों को अहम पदों पर बिठाना लगभग असंभव सा हो जाएगा।
सियासी संदेश और अपनी ही पार्टी में बढ़ता विरोध
इन मध्यावधि चुनावों के नतीजों को डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल पर एक तरह के जनमत संग्रह (Referendum) के तौर पर देखा जा रहा है। इन परिणामों से जनता के बीच यह संदेश गया है कि उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है। यह स्थिति रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ट्रंप के विरोधियों का हौसला बढ़ाने का काम करेगी। यानी आने वाले दिनों में ट्रंप को सिर्फ विपक्षी डेमोक्रेट्स से ही नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर से उठने वाले विरोध के सुरों से भी निपटना होगा।






