Amit Jogi Controversy: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बवाव खड़ा हो गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक वीडियो शेयर किया गया था। इस तीखे वीडियो के सामने आते ही सियासी पारा चढ़ गया है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मोर्चा खोल दिया है।
सिविल लाइंस थाने में FIR की मांग
मंगलवार को भाजपा का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचा और पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। इस प्रतिनिधिमंडल में विधायक राजेश मूणत समेत कई दिग्गज नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा का सीधा आरोप है कि अमित जोगी ने देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल किया है, जिससे आम जनता और कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। पुलिस को दिए गए ज्ञापन में यह मांग भी की गई है कि न सिर्फ अमित जोगी, बल्कि इस वीडियो की पटकथा (स्क्रीप्ट) लिखने वाले, इसे शूट करने वाले और इसमें शामिल अन्य सभी लोगों के खिलाफ भी कानूनी शिकंजा कसा जाए। भाजपा नेताओं का तर्क है कि लोकतंत्र में असहमतियों के अपने दायरे होते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और चुनाव आयुक्त जैसे गरिमामय पदों का इस तरह मखौल उड़ाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के बिल्कुल खिलाफ है।
चौतरफा घिरने के बाद डिलीट किया वीडियो और मांगी माफी
मामला तूल पकड़ता देख और चारों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आने के बाद अमित जोगी बैकफुट पर आ गए हैं। उन्होंने विवादित वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया है। इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य पोस्ट के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। अपने माफीनामे में अमित जोगी ने स्वीकार किया कि उनकी बात रखने का अंदाज और तरीका सही नहीं था। उन्होंने माना कि वे जिस संदेश को जनता तक पहुंचाना चाहते थे, उसे किसी दूसरे और बेहतर तरीके से भी रखा जा सकता था। व्यंग्य की अपनी एक मर्यादा होती है, जिसे वे लांघना नहीं चाहते थे। इसी का अहसास होने पर उन्होंने पोस्ट डिलीट कर दी और जिन लोगों की भावनाएं इस वीडियो से आहत हुईं, उनसे क्षमा याचना की है।
आखिर किस बात पर छिड़ा है विवाद?
यह पूरा विवाद दरअसल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी 'SIR' प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। अमित जोगी पिछले कुछ दिनों से देश में चल रही इस SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे थे। उनका आरोप था कि इस प्रक्रिया के आड़ में चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता खो रहा है। इसी मुद्दे को मुखर करने के चक्कर में उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर यह वीडियो पोस्ट किया था, जो अब उनके गले की फांस बन गया है।
24 घंटे का अल्टीमेटम और आगे की हलचल
घटना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक राजेश मूणत ने दो-टूक कहा कि संवैधानिक पदों की गरिमा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा ने पुलिस प्रशासन को साफ तौर पर 24 घंटे के भीतर इस मामले में ठोस कानूनी कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी का कहना है कि यदि तय समय सीमा के भीतर एफआईआर दर्ज कर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भाजपा सड़कों पर उतरकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी। फिलहाल, पुलिस ने भाजपा नेताओं की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की अंदरूनी जांच शुरू कर दी है। देखना यह होगा कि आने वाले घंटों में प्रशासन इस सियासी दबाव के बीच क्या रुख अपनाता है।







