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Amit Jogi Controversy: PM मोदी और CEC पर वीडियो पोस्ट कर घिरे अमित जोगी, BJP पहुंची थाने
Amit Jogi Controversy: छत्तीसगढ़ की राजनीति में अमित जोगी के सोशल मीडिया वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े वीडियो पर भाजपा ने आपत्ति जताते हुए रायपुर के सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई और FIR की मांग की। विधायक राजेश मूणत ने 24 घंटे में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने वीडियो डिलीट कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। पूरा मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है।
देश
रामअवतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सरेंडर पर लगी अस्थायी रोक
छत्तीसगढ़ के रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा पूर्व विधायक अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और उन्हें 23 अप्रैल तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया था। लेकिन सरेंडर से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए उनके सरेंडर पर अस्थायी रोक लगा दी है। कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा या नहीं।
छत्तीसगढ़
जग्गी मर्डर केस में बड़ा फैसला : अमित जोगी दोषी, हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रामावतार जग्गी हत्याकांड में Amit Jogi को हत्या और साजिश का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने 2007 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि सभी आरोपियों में भेदभाव नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस
Chhattisgarh Congress: जोगी कांग्रेस के विलय की अटकलें तेज, 36 बागी नेताओं की घर वापसी पर मंथन
Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस संगठन पुराने नेताओं की वापसी और बागियों को साथ लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी बीच छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जेसीसी-जे) के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। 27 सितंबर को प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
अन्य
जग्गी हत्याकांड : सियासत, न्याय और समय की लंबी लड़ाई का निर्णायक मोड़, फैसले ने फिर गरमाई छत्तीसगढ़ की राजनीति
छत्तीसगढ़ के विस्तृत फैसले ने यह स्पष्ट किया कि समान साक्ष्यों के आधार पर किसी एक आरोपी को अलग राहत देना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस टिप्पणी ने मामले की दिशा तय करने के साथ ही न्यायिक दृष्टिकोण को भी साफ किया। करीब 78 पन्नों के आदेश में अदालत ने यह स्थापित किया कि साजिश के तानेबाने में आरोपी की भूमिका निर्णायक रही। इसी आधार पर सजा सुनाते हुए अदालत ने यह भी संदेश दिया कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया अंततः साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष तक पहुंचती है।