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Chhattisgarh Congress JCC-J merger political meeting (Image Source: social media)
Chhattisgarh Congress JCC-J merger political meeting (Image Source: social media)
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Chhattisgarh Congress: जोगी कांग्रेस के विलय की अटकलें तेज, 36 बागी नेताओं की घर वापसी पर मंथन

Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस संगठन पुराने नेताओं की वापसी और बागियों को साथ लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी बीच छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जेसीसी-जे) के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। 27 सितंबर को प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 19 Sep 2026, 03:27 PM · अपडेट: 02 Nov 2026, 01:25 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh Congress: आगामी अक्टूबर-नवंबर में होने वाले 15 नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गर्मा गया है। विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी से किनारा करने या बगावत करने वाले पुराने नेताओं को वापस लाने के लिए प्रदेश कांग्रेस ने कवायद तेज कर दी है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ अजीत जोगी की पार्टी 'छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस' (जेसीसी-जे) के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं से आया है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व विधायक डॉ. रेणु जोगी और पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने अपनी पूरी टीम के साथ कांग्रेस में वापसी और पार्टी के विलय का औपचारिक आवेदन सौंपा है।

भूपेश बघेल के रुख के बावजूद अंदरूनी जोर-आजमाइश 

राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि कांग्रेस संगठन का एक बड़ा धड़ा जोगी कांग्रेस को साथ लाने के पक्ष में है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस विलय के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पर्दे के पीछे से सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। यदि यह विलय सिरे चढ़ता है, तो इसे भूपेश बघेल के सियासी दबदबे के लिए एक झटके के रूप में देखा जाएगा। आपको बता दें कि 2023 के विधानसभा चुनाव में अमित जोगी ने भूपेश बघेल के खिलाफ ही पाटन से मोर्चा खोला था। इसके साथ ही, टीएस सिंहदेव के सियासी प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने भी कांग्रेस में वापस आने के लिए अर्जी दी है। खबर यह भी है कि भाजपा के कुछ असंतुष्ट चेहरे भी कांग्रेस का रुख कर सकते हैं। वर्ष 2018 के चुनावों में जोगी की पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी, हालांकि बाद में समीकरण बदलते चले गए।

27 सितंबर का दिन बेहद खास: नए प्रभारी सुखदेव भगत लेंगे बैठक 

अब पूरे प्रदेश की निगाहें 27 सितंबर को रायपुर आ रहे नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के दौरे पर टिकी हैं। हाल ही में कमान संभालने वाले सुखदेव भगत इस दौरे के दौरान वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में जोगी कांग्रेस के विलय की फाइल टेबल पर रखी जाएगी और अंतिम फैसला लिया जाएगा।

अनुशासन समिति की बैठक में छंटनी: 36 में से 15-16 आवेदन खारिज 

बीते शुक्रवार को कांग्रेस अनुशासन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें लंबे समय से लंबित पड़े 36 बागियों के आवेदनों पर विचार हुआ। समिति ने कुछ चेहरों को हरी झंडी दे दी है, जबकि 15 से 16 नेताओं की अर्जी को सीधे तौर पर निरस्त कर दिया गया है। समिति के अध्यक्ष धनेंद्र साहू का कहना है कि जोगी कांग्रेस की वापसी का मामला एक पूरी पार्टी के विलय से जुड़ा है, इसलिए इस पर कोई भी अंतिम निर्णय नए प्रभारी सुखदेव भगत से चर्चा के बाद ही संभव हो पाएगा।

बयानबाजी और अनुशासनहीनता पर पैनी नजर 

आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने अनुशासन का चाबुक चलाने की पूरी तैयारी कर ली है। अब सोशल मीडिया पोस्ट, टीवी डिबेट्स, अखबारों में दिए गए बयानों और सार्वजनिक मंचों से पार्टी लाइन के खिलाफ बोलने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के विरोध में काम करने वालों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की रणनीति बनाई गई है।

भाजपा का तंज: 'डूबते को तिनके का सहारा' 

कांग्रेस के भीतर चल रही इस हलचल पर भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसने में देर नहीं की। पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस की हालत इस समय ऐसी हो चुकी है जैसे "डूबते को तिनके का सहारा"। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी साख बचाने के लिए अब हर दरवाजे पर दस्तक दे रही है। 
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