Congress Election Strategy: छत्तीसगढ़ में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों का पारा अभी से चढ़ने लगा है। खासतौर पर भिलाई, रिसाली, भिलाई-चरोदा और बीरगांव—इन चारों अहम नगर निगमों में दिसंबर संभावित चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग की तरफ से भले ही अभी तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अंदरखाने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इस बार पार्टी ने टिकट बंटवारे से लेकर स्थानीय मुद्दों को धार देने तक एक बिल्कुल जमीनी रणनीति तैयार की है, जिसमें सीधे कार्यकर्ताओं और वार्ड कमेटियों को तरजीह दी जा रही है।
वार्ड कमेटियों के सुझावों पर लगेगी मुहर
कांग्रेस की रणनीति के मुताबिक, इस बार उम्मीदवारों के चयन में हवा-हवाई फैसले नहीं होंगे। चुनावी प्रबंधन के लिए नियुक्त एक सह-पर्यवेक्षक ने अंदरूनी सुगबुगाहट साझा करते हुए बताया कि चारों निगमों के हर वार्ड में विशेष कमेटियों का गठन किया जा रहा है। यही कमेटियां जमीन पर टटोलेंगी कि जनता का मूड क्या है, स्थानीय राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठ रहे हैं और पार्टी का कौन सा कार्यकर्ता सबसे मजबूत स्थिति में है। प्रक्रिया यह होगी कि वार्ड कमेटियां ही संभावित प्रत्याशियों के नाम आगे बढ़ाएंगी। यदि किसी एक वार्ड से एक से ज्यादा मजबूत दावेदार सामने आते हैं और स्थानीय स्तर पर आम सहमति नहीं बन पाती, तब पर्यवेक्षक बीच का रास्ता निकालेंगे। हालांकि, अंतिम सूची पर मुहर लगाने का अधिकार अंततः प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के पास ही रहेगा।
हर निगम के लिए अलग होगा विजन डॉक्यूमेंट
आमतौर पर चुनाव में एक ही तरह का कॉमन मेनिफेस्टो जारी करने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार कांग्रेस कुछ अलग मूड में दिख रही है। पार्टी इन चारों नगर निगमों के लिए अलग-अलग घोषणा-पत्र तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। इसके पीछे सोच यह है कि हर शहर की समस्याएं और जरूरतें अलग होती हैं। चुनावी एजेंडे में बड़े राजनीतिक नारों के साथ-साथ आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों को सबसे ऊपर रखा जाएगा। विशेष गहन पुनरीक्षण, बिजली कटौती, पेयजल संकट, घर-घर कचरा उठान, टूटी सड़कें, पानी निकासी, जलभराव और बुनियादी नागरिक सुविधाओं को हथियार बनाकर कांग्रेस मतदाताओं के बीच उतरने की तैयारी कर रही है। वार्ड स्तर पर अभी से स्थानीय समस्याओं का डेटा जुटाया जा रहा है ताकि घोषणा-पत्र में सिर्फ खोखले वादे न होकर जनता की वास्तविक मांगें शामिल हों।अपनी गद्दी बचाए रखने की बड़ी चुनौती
कांग्रेस के लिए इन चारों निगमों का चुनाव नाक का सवाल भी है। फिलहाल इन सभी चारों नगर निगमों में कांग्रेस के ही महापौर काबिज हैं। ऐसे में, पार्टी के सामने अपने मौजूदा गढ़ और जनाधार को हर हाल में बचाए रखने की कड़ी चुनौती है। जैसे-जैसे वार्डों के आरक्षण की स्थिति साफ होती जा रही है, पार्षद और मेयर पद के दावेदारों की सक्रियता भी अचानक कई गुना बढ़ गई है। टिकट की आस लगाए नेता अभी से स्थानीय समीकरण साधने में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में जैसे ही चुनाव की तारीखें नजदीक आएंगी, प्रत्याशियों के चयन और जमीनी मुद्दों को लेकर राजनीतिक तापमान और ज्यादा गर्माने के पूरे आसार हैं।






