NHRC Notice: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। विजयदशमी के पावन अवसर पर उज्जैन से शुरू हुई इस यात्रा में स्कूली बच्चों को शामिल करने और उनसे सियासी नारे लगवाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ा नोटिस जारी किया है।
NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को आधिकारिक पत्र भेजकर दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने अपने आदेश में मुख्य तौर पर इन अहम बिंदुओं पर जवाब मांगा है:
क्या वाकई राजनीतिक लाभ साधने के लिए बच्चों का इस्तेमाल किया गया?
क्या इन बच्चों को यात्रा में शामिल होने के लिए किसी प्रकार का भुगतान किया गया था?
क्या इस घटनाक्रम के दौरान बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों की अनदेखी या उल्लंघन हुआ है?
केंद्रीय IT मंत्रालय को भी भेजा गया नोटिस
इस विवादित मामले की आंच सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित नहीं रही है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका संज्ञान लिया गया है। NHRC ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को भी नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि बच्चों की पहचान को उजागर करने वाले वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कैसे वायरल हुए और इस पर मंत्रालय या संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक क्या एक्शन लिया गया है।
उज्जैन के शिवधाम से शुरू हुई थी यात्रा
विवादों के बीच, यदि इस यात्रा के शुरुआती स्वरूप की बात करें तो विजयदशमी के दिन उज्जैन के शिवधाम से इसकी भव्य शुरुआत हुई थी। 'महाकाल' और 'जय श्री राम' के गूंजते नारों के बीच सैकड़ों साधु-संत सनातन धर्म का ध्वज थामे पदयात्रा कर रहे थे। इस यात्रा में एक विशेष रथ भी आकर्षण का केंद्र है, जिस पर भगवान शिव और माता पार्वती की बेहद भव्य झांकी सजाई गई है।






