Supreme Court News: देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार का दिन राजनीतिक गहमागहमी से भरा रहा। एक तरफ जहां नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने सड़कों पर उतरकर सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकाला, वहीं दूसरी ओर कानूनी मोर्चे पर विपक्ष को एक बड़ा झटका लगा है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका को रजिस्ट्री ने सूचीबद्ध (लिस्ट) करने से इनकार कर दिया। तकनीकी जांच के दौरान इस याचिका में एक-दो नहीं, बल्कि पूरी 14 कमियां पाई गई हैं।
वकालतनामे पर 9 प्रमुख नेताओं के दस्तखत गायब
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा उठाई गई आपत्तियों में सबसे प्रमुख मुद्दा वकालतनामे से जुड़ा है। नियम के अनुसार, वकालतनामा वह कानूनी दस्तावेज होता है जिसके जरिए याचिकाकर्ता वकील को अदालत में अपनी पैरवी करने का आधिकारिक अधिकार देता है। अदालत की जांच में पाया गया कि याचिका में शामिल 9 प्रमुख विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर ही गायब थे। इनमें अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, सौगत रॉय, एम ए बेबी, डी राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
खड़गे का पहचान पत्र और फीस भी अधूरी
रजिस्ट्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की प्रति (ID Proof) पर भी आपत्ति जताई है। अदालत ने खड़गे के पहचान पत्र की एक बिल्कुल साफ और आसानी से पढ़ी जा सकने वाली प्रति जमा करने को कहा है। इसके अलावा, याचिका दाखिल करने की तय फीस में भी 220 रुपये की कमी पाई गई।
व्यक्तिगत चुनाव आयुक्तों को पक्षकार बनाने पर सवाल
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस याचिका में चुनाव आयोग के साथ-साथ चुनाव आयुक्तों को भी व्यक्तिगत तौर पर प्रतिवादी (Respondent) बनाया गया है। इस पर रजिस्ट्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया है कि चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से इसमें पक्षकार क्यों बनाया गया?
सॉफ्ट कॉपी और जरूरी दस्तावेज भी मांगे
रजिस्ट्री ने याचिकाकर्ताओं को 24 जून 2025 के पुराने फैसले की प्रतियां और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए मतदाताओं के नामों से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट सॉफ्ट कॉपी में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। अब जब तक इन सभी कानूनी और तकनीकी खामियों को दुरुस्त करके याचिका दोबारा दाखिल नहीं की जाती, तब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई नहीं करेगा।







