Donald Trump: इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनावों की सरगर्मियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का खुलकर पक्ष लिया है और वहां की जनता से नेतन्याहू को एक बार फिर देश की कमान सौंपने की अपील की है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों ने मिलकर ईरान के खिलाफ जो मुहिम शुरू की थी, उसे अंजाम तक पहुंचाना अभी बाकी है।
विश्लेषक ट्रंप के इस बयान को इजरायल के मौजूदा चुनावी माहौल और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के संदर्भ में बेहद अहम मान रहे हैं।
ट्रुथ सोशल पर लिखा- 'मजबूत है हमारी जोड़ी'
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक संदेश साझा करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री की जमकर तारीफ की। दोनों देशों के गहरे रणनीतिक रिश्तों का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान की सैन्य क्षमता को ध्वस्त करने की दिशा में ऐतिहासिक काम किया है। उन्होंने दावा किया कि इन संयुक्त कार्रवाइयों से ईरानी नौसेना, वायुसेना और वहां की अर्थव्यवस्था को काफी गहरा धक्का पहुंचा है।
ट्रंप ने इजरायली मतदाताओं से सीधी अपील करते हुए कहा कि वोट डालते वक्त वे नेतन्याहू की मजबूत नेतृत्व क्षमता और कड़े फैसलों को जरूर ध्यान में रखें। उनका मानना है कि ईरान से उपजते खतरों से निपटने के लिए नेतन्याहू का सत्ता में रहना बेहद जरूरी है।
नेतन्याहू के लिए आसान नहीं है इस बार की राह
हालांकि, इजरायल की घरेलू राजनीति में इस बार का चुनाव नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। हाल ही में आए कई ओपिनियन पोल और सर्वेक्षणों के आंकड़े नेतन्याहू के सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। सर्वेक्षणों में उनके गठबंधन को बहुमत के आंकड़े से पीछे दिखाया गया है। गौरतलब है कि इजरायली संसद (नेसेट) में सरकार बनाने के लिए कुल 120 में से कम से कम 61 सीटों का आंकड़ा हासिल करना अनिवार्य होता है।
परमाणु खतरे की तस्वीर और गरमाती सियासत
चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में नेतन्याहू ने ईरान से मिलने वाली चुनौतियों को देश की सुरक्षा का सबसे मुख्य मुद्दा बना दिया है। उन्होंने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एआई (AI) द्वारा तैयार एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें तेल अवीव शहर पर परमाणु हमले जैसा मंजर दर्शाया गया था। इसके जरिए उन्होंने जनता को सचेत करने की कोशिश की कि इजरायल पर किस स्तर का सुरक्षा संकट मंडरा रहा है।
दूसरी ओर, विपक्षी खेमा इसे चुनावी हथकंडा करार दे रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि नेतन्याहू जनता के बीच डर का माहौल बनाकर और ईरान पर कड़ा रुख दिखाकर वोट बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, नेतन्याहू ने विपक्ष के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।







