France Protest: फ्रांस की गैलरी और स्ट्रीट इन दिनों एक तरह से जारी असंतोष अब विकराल रूप ले चुका है। राजधानी पेरिस से लेकर देश के दूसरे बड़े शहरों तक के शौचालय बेहद खराब हो गए हैं। आलम यह है कि सरकार को पूरे देश में 70 हजार से ज्यादा सुरक्षा नेटवर्क मैदान में उतारने के लिए स्थिति को जारी करना है। स्काई में हेलीकॉप्टरों के डेक और स्ट्रीट पर रॉकेट्स बख्तरबंद डूबे इस बात की गवाही दे रही हैं कि फ्रांस इस समय एक गंभीर आंतरिक संकट से जूझ रहा है।
पूरे देश में शुरू हुआ युवाओं का विरोध फोटो
2 हफ्ते पहले फ्रांस के कुछ विद्वानों ने स्कॉलरशिप की कमी और सुलतान व्यवस्था को लेकर छात्रों ने दबी जंजाम में आवाज उठानी शुरू की थी। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि यह शिंगरी इतनी जल्दी शोला बन जाएगी। देखते ही देखते यह विरोध सिर्फ छात्रों तक सीमित वेतन, पेंशन और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के खिलाफ एक बड़े राष्ट्र जनआंदोलन में प्रदर्शन हो गया। टोयोटा, पेरिस के साथ-साथ लियोन, क्लेरमोंट-फेरान, स्ट्रासबर्ग, नीस और नैनटेस जैसे प्रमुख शहरों में निकोल्स शामिल हैं। मोटरसाइकिलों पर भीड़ की पुलिस के साथ रेस्टॉरेंट मछुआरे हो रही हैं। कई जगहों पर किराने की दुकानें, गोदामों में थोक और गोदामों की घटनाएं सामने आती हैं। प्रदर्शनकारियों को टाइटर-बिटर करने के लिए सुरक्षा बलों को लगातार गैस के उपकरण लगाए जा रहे हैं और वॉटर कैन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या हैं बेरोजगारों की मुख्य मांगें?
- पारकोर्सैप सिस्टम को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाएगा।
- विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षण छात्रों में हजारों नए छात्र-छात्राएँ शामिल हैं।
- स्कूलों में बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की पक्की (स्थायी) भर्तियां होन और उन्हें उनका माटी सम्मान मिला।
- एक मजबूत राष्ट्रीय आधारशिला तैयार की जाए।
राष्ट्रपति मैसाचुसेट्स की अपील, जनता को सुनने के लिए तैयार नहीं
देश के विरासत स्मारकों को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल इंजीनियर्स ने एक बार फिर नागरिकों से संयम और शांति बनाए रखने की परंपरा रखी है। जनता के नाम अपने संदेश में ग्राहम ने स्वीकार किया कि समाज में यह घुघुन और तनाव रातों-रात पैदा नहीं हुआ, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं। ओझा देश के तने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। राष्ट्रपति मैसाचुसेट्स ने कहा, यह समय एक-दूसरे के विरुद्ध के हितैषी होने का नहीं है। हमें यह कहा जाएगा कि हमारा गणतंत्र फूट पर नहीं, बल्कि एकता और साम्य पर रुका है। कुछ लोगों के लाभ समूह समाज को बांटना है, उनकी बहकावे में आने से बचना होगा।







